नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ के गाने ‘मंगल रंग’ को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच मशहूर संगीतकार एआर रहमान ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। गाने के संगीत को लेकर हो रही आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रहमान ने कहा कि वह अपने काम को पूरी ईमानदारी से करते हैं और हर बार सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाओं को देखने के लिए उनके पास ऊर्जा नहीं बचती। उनके इस बयान के बाद फिल्म के संगीत और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
‘लोग पहले आलोचना करते हैं, फिर माफी मांगते हैं’
एक इंटरव्यू में एआर रहमान ने बताया कि किसी गाने को तैयार करने के पीछे काफी मेहनत होती है। संगीतकार और उनकी टीम कई चरणों में विचार-विमर्श, बदलाव और परीक्षण से गुजरती है। इसके बाद ही किसी गाने को दर्शकों के सामने पेश किया जाता है।
रहमान के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में इतनी मेहनत लगती है कि रिलीज के बाद हर प्रतिक्रिया पर नजर रखने की ऊर्जा नहीं बचती। उन्होंने बताया कि उनके बेटे उन्हें सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के बारे में बताते रहते हैं। कभी कोई व्यक्ति गाने की आलोचना करता है, तो बाद में वही अपनी राय बदल लेता है या माफी मांगने लगता है।
रहमान का कहना है कि वह इन प्रतिक्रियाओं को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होते। उन्होंने अपना काम ईमानदारी से किया है और उन्हें उम्मीद है कि लोग उनके संगीत को पसंद करेंगे।
‘मंगल रंग’ के संगीत पर क्यों मचा बवाल?
फिल्म ‘रामायण’ का गाना ‘मंगल रंग’ भगवान राम और माता सीता के विवाह के उत्सव को दर्शाता है। इस गाने को अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसके बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं। संगीत की जिम्मेदारी एआर रहमान ने संभाली है।
गाना रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं बंट गईं। कुछ लोगों ने इसकी धुन और संगीत संयोजन की तारीफ की, जबकि कई यूजर्स ने इसके अंदाज पर सवाल उठाए। आलोचकों का कहना है कि गाने में कव्वाली और सूफी संगीत जैसी अनुभूति मिलती है, जो उनके मुताबिक रामायण की पारंपरिक पृष्ठभूमि के अनुरूप नहीं है।
कुछ यूजर्स ने इसकी तुलना रणबीर कपूर की फिल्म ‘रॉकस्टार’ के लोकप्रिय गाने ‘कुन फाया कुन’ से भी की। वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि रहमान ने अपनी पुरानी संगीत शैली को दोहराया है। हालांकि, ये सोशल मीडिया यूजर्स की राय और आरोप हैं, न कि किसी तरह की प्रमाणित नकल का निष्कर्ष। दूसरी ओर, कई संगीत प्रेमी रहमान के समर्थन में भी सामने आए हैं। उनका मानना है कि किसी रचना का मूल्यांकन उसकी पूरी संगीत संरचना और भावनात्मक प्रभाव के आधार पर होना चाहिए।
‘रामायण’ के संगीत को बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं रहमान
एआर रहमान ने फिल्म के लिए संगीत तैयार करने को अपने लिए बड़ा सम्मान और जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार, रामायण ऐसी महागाथा है, जिसे भारत में लगभग हर कोई जानता है। इसलिए इससे जुड़ा संगीत तैयार करना सामान्य फिल्म के लिए संगीत बनाने जैसा काम नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पुराने सफल गानों की शैली में ही बंधकर नहीं रहना चाहते। उनके मुताबिक, एक कलाकार को लगातार आगे बढ़ना चाहिए और नए प्रयोग करते रहना चाहिए। रहमान ने फिल्म के संगीत के लिए जर्मन संगीतकार हैंस जिमर के साथ काम करने को भी खास अनुभव बताया।
रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म पर नजरें
निर्देशक नितेश तिवारी की ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म को दो भागों में बनाने की योजना है।
अब देखना होगा कि ‘मंगल रंग’ को लेकर चल रही बहस फिल्म की रिलीज के बाद किस दिशा में जाती है। फिलहाल, इस विवाद ने फिल्म के संगीत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


