चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे सरकार बदलने की कोशिश है और यह बांग्लादेश जैसे घटनाक्रम से प्रेरित है। कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में सरकार बदलने का संवैधानिक रास्ता चुनाव है। पार्टी नेता पवन खेड़ा ने इस बहस में 1977 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए भाजपा को जवाब दिया।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष के प्रदर्शन पर उठाए सवाल
राजनाथ सिंह ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, न कि अशांति पैदा करना। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के जरिए राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। उनके बयान के बाद कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस ने 1977 के चुनाव का दिया उदाहरण
कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा ने 1977 के लोकसभा चुनाव की याद दिलाते हुए तर्क दिया कि भारत में सरकार बदलने का फैसला जनता चुनाव के जरिए करती है। 1975 से 1977 के आपातकाल के बाद हुए चुनाव में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था और जनता पार्टी सत्ता में आई थी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाता है।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी इन मुद्दों पर जवाबदेही की मांग कर रही है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी विवाद
इस राजनीतिक टकराव के बीच दिल्ली में प्रदर्शन स्थल को लेकर भी विवाद जारी है। दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के दर्जे से हटाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान को वैकल्पिक प्रदर्शन स्थलों के रूप में नामित किया गया।
इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 15 अक्टूबर को अदालत ने केंद्र, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग से जुड़े मामलों में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।
इस पूरे विवाद में एक ओर भाजपा विपक्ष के प्रदर्शनों को राजनीतिक अस्थिरता से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा मुद्दा बता रही है। आने वाले दिनों में अदालत में होने वाली सुनवाई और दोनों दलों के बयानों से यह विवाद और स्पष्ट हो सकता है।


