पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सऊदी अरब की राजधानी रियाद में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए घातक हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी वायु रक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने सोमवार, 12 अक्टूबर को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई से फोन पर बातचीत की। दोनों के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ भारत और ईरान के साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब खाड़ी क्षेत्र में हमलों का दायरा बढ़ने और संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए भी यह स्थिति महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। साथ ही, भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हित भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
रियाद में हमले के बाद क्राउन प्रिंस की सुरक्षा बढ़ी
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को भारी सुरक्षा वाले ऐसे शाही महलों के बीच ले जाया जा रहा है, जहां बंकर भी मौजूद हैं। उनके साथ चुनिंदा सुरक्षा कर्मियों की टीम है। हालांकि, सऊदी सरकार ने उनकी गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी इन रिपोर्टों की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।
रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए हमले में 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। मृतकों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। हमले के बाद सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, देश को मिसाइलों और ड्रोन को हवा में नष्ट करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता को लेकर भी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
भारत ने हमले की निंदा की
भारत ने रियाद के हवाई अड्डे और अन्य नागरिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए इन्हें तत्काल रोकने की मांग की। भारतीय दूतावास ने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह भी दी है।
क्या आगे बढ़ सकता है संघर्ष?
सऊदी अरब पर लगातार हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है। अमेरिका की संभावित सैन्य भूमिका और हूती विद्रोहियों की ओर से आगे भी हमले किए जाने की धमकियों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे माहौल में भारत और ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के बीच बातचीत को क्षेत्रीय घटनाक्रम के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, डोभाल और रेजाई के बीच बातचीत के आधिकारिक विवरण में किसी सैन्य कार्रवाई या विशेष समझौते की घोषणा नहीं की गई। फिलहाल भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर रखने, अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने से जुड़ी है।


