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    राजामौली@53: भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित निर्देशक, ‘बाहुबली’ ने दी पहचान, ‘RRR’ से हुआ नाम

    कभी अपने भविष्य को लेकर असमंजस में रहने वाले एसएस राजामौली आज भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित निर्देशकों में गिने जाते हैं। ‘बाहुबली’, ‘आरआरआर’, ‘मगधीरा’ और ‘मक्खी’ जैसी फिल्मों से उन्होंने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि भारतीय फिल्मों को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि फिल्मी दुनिया में उनका शुरुआती कदम किसी बड़े सपने या योजना का नतीजा नहीं था। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि पिता की डांट से बचने के लिए उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया था। धीरे-धीरे यही काम उनका जुनून बन गया। 10 अक्टूबर को अपना 53वां जन्मदिन मना रहे राजामौली की कहानी संघर्ष, सीख और बड़े विजन की मिसाल है।

    पिता से सीखा, फिर खुद बनाई अलग पहचान

    एसएस राजामौली का पूरा नाम कोडुरी श्रीशैला श्री राजामौली है। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1973 को हुआ था। उनके पिता केवी विजेंद्र प्रसाद दक्षिण भारतीय सिनेमा के जाने-माने लेखक और पटकथा लेखक हैं। राजामौली ने शुरुआती दौर में अपने पिता के साथ काम करते हुए फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखीं। शुरुआत में उनकी इच्छा लेखक बनने की थी और उन्होंने कई कहानियां भी लिखीं। हालांकि, जब उनकी लिखी पटकथाओं को निर्देशकों से खास प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने निर्देशन की राह चुनी।

    उन्होंने चेन्नई में फिल्म निर्माण से जुड़ा काम सीखा और विज्ञापनों तथा टेलीविजन कार्यक्रमों के निर्देशन का अनुभव हासिल किया। इसके बाद साल 2001 में फिल्म ‘स्टूडेंट नंबर 1’ से फीचर फिल्म निर्देशन की शुरुआत की। जूनियर एनटीआर के साथ उनकी फिल्म ‘सिम्हाद्रि’ ने उन्हें तेलुगु सिनेमा में मजबूत पहचान दिलाई।

    ‘मगधीरा’ से ‘मक्खी’ तक दिखाया नया अंदाज

    साल 2009 में रिलीज हुई ‘मगधीरा’ राजामौली के करियर का अहम पड़ाव बनी। राम चरण और काजल अग्रवाल अभिनीत इस फिल्म ने अपनी भव्यता, पुनर्जन्म की कहानी और प्रभावशाली एक्शन से दर्शकों का ध्यान खींचा। यह उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्मों में शामिल हुई।

    इसके बाद 2012 में आई ‘ईगा’, जिसे हिंदी में ‘मक्खी’ नाम से जाना जाता है, ने उनकी कल्पनाशीलता का एक अलग रूप दिखाया। एक मक्खी के जरिए बदले की कहानी कहने वाली इस फिल्म को दर्शकों के साथ फिल्म समारोहों में भी सराहना मिली। राजामौली की फिल्मों की खासियत यह रही कि वह असामान्य विचारों को बड़े पर्दे पर भव्य और भावनात्मक अंदाज में पेश करते हैं।

    ‘बाहुबली’ ने बदल दिया भारतीय सिनेमा का पैमाना

    राजामौली को देशभर में पहचान दिलाने वाली फिल्म फ्रेंचाइजी ‘बाहुबली’ रही। साल 2015 में आई ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ ने दर्शकों के सामने एक विशाल काल्पनिक दुनिया पेश की। इसके दूसरे भाग ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने 2017 में कमाई के बड़े रिकॉर्ड बनाए और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वाली पहली भारतीय फिल्मों में ऐतिहासिक स्थान हासिल किया।

    इसके बाद 2022 में रिलीज हुई ‘आरआरआर’ ने उनकी लोकप्रियता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। फिल्म के गीत ‘नाटू नाटू’ ने ऑस्कर और गोल्डन ग्लोब पुरस्कार जीतकर भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर खास पहचान दिलाई। फिल्म को अन्य अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में भी सम्मान मिला।

    फीस और भव्य फिल्मों के लिए चर्चा में

    लगातार सफल फिल्मों, बड़े बजट और तकनीकी स्तर पर महत्वाकांक्षी प्रस्तुतियों के कारण राजामौली भारत के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले निर्देशकों में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उनकी फीस को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं। उनकी सफलता का आधार केवल बड़े बजट नहीं, बल्कि कहानी कहने की शैली, दृश्यों की भव्यता और दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखने की क्षमता भी है।

    अब राजामौली की नजर अपनी अगली महत्वाकांक्षी फिल्म ‘वाराणसी’ पर है। इस फिल्म में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनस और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज 2027 में प्रस्तावित है। राजामौली के जन्मदिन पर उनकी यात्रा यह दिखाती है कि जिस व्यक्ति ने कभी डांट से बचने के लिए काम शुरू किया था, वह अपनी मेहनत और कल्पनाशीलता से भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली फिल्मकारों में शामिल हो गया।

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