मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप के लिए जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रस्तावित शेयर बाजार लिस्टिंग बड़ा बदलाव लेकर आ सकती है। जियो के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद रिलायंस ग्रुप कुल बाजार पूंजीकरण के मामले में टाटा ग्रुप को पीछे छोड़कर देश का सबसे मूल्यवान कारोबारी समूह बन सकता है। यह बदलाव भारतीय कॉरपोरेट जगत की रैंकिंग में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह अनुमान जियो की प्रस्तावित वैल्यूएशन और मौजूदा बाजार पूंजीकरण पर आधारित है। वास्तविक स्थिति शेयरों की लिस्टिंग और बाजार में उनके प्रदर्शन के बाद स्पष्ट होगी।
10.3 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन पर जियो की नजर
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। ऊपरी स्तर पर कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये बैठती है। कंपनी इस आईपीओ के जरिए लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है, जबकि आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा। इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए निवेशकों को देश की सबसे बड़ी दूरसंचार और डिजिटल सेवा कंपनियों में से एक में सीधे निवेश का अवसर मिलेगा।
लिस्टिंग के बाद 28.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है रिलायंस ग्रुप
जियो की लिस्टिंग से पहले रिलायंस ग्रुप और टाटा ग्रुप के कुल बाजार पूंजीकरण में अंतर बना हुआ है। 15 अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण करीब 16.55 लाख करोड़ रुपये और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये था। दोनों को मिलाकर रिलायंस ग्रुप का बाजार मूल्य लगभग 18 लाख करोड़ रुपये बैठता है।
वहीं, टाटा ग्रुप की कुल सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण करीब 25.5 लाख करोड़ रुपये था। जियो प्लेटफॉर्म्स की अनुमानित वैल्यूएशन जोड़ने पर रिलायंस ग्रुप का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग 28.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस अनुमान के आधार पर रिलायंस ग्रुप टाटा ग्रुप से आगे निकल सकता है।
जियो की ताकत क्या है?
जियो ने 2016 में दूरसंचार बाजार में प्रवेश किया था। सस्ती डेटा सेवाओं और बड़े नेटवर्क के दम पर कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और आज देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनियों में शामिल है। कंपनी के पास 50 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं और उसके नेटवर्क से भारत के लगभग 60 प्रतिशत डेटा ट्रैफिक के गुजरने का अनुमान है।
जियो का कारोबार अब केवल मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं है। कंपनी ब्रॉडबैंड, डिजिटल ऐप, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज समाधान और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है। मेटा और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियां भी जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश कर चुकी हैं।
निवेशकों की नजर लिस्टिंग पर
जियो का अलग से शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना निवेशकों को कंपनी की वास्तविक बाजार वैल्यू समझने का अवसर देगा। अभी जियो का मूल्य रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबार में शामिल है। अलग लिस्टिंग से निवेशक दूरसंचार और डिजिटल कारोबार का मूल्यांकन स्वतंत्र रूप से कर सकेंगे।
हालांकि, कंपनी की ऊंची वैल्यूएशन अपने आप में भविष्य में बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं है। जियो के लिए बड़ी चुनौती अपने विशाल ग्राहक आधार को लगातार बढ़ती कमाई में बदलना और डिजिटल सेवाओं से अधिक मुनाफा हासिल करना होगा।
कुल मिलाकर, जियो की लिस्टिंग रिलायंस ग्रुप और टाटा ग्रुप के बीच बाजार पूंजीकरण की प्रतिस्पर्धा को नया मोड़ दे सकती है। लेकिन अंतिम तस्वीर शेयर बाजार में जियो की वास्तविक लिस्टिंग वैल्यू और उसके बाद होने वाले उतार-चढ़ाव से ही तय होगी।


