होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के एक फैसले ने दक्षिण एशिया की कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने का ऐलान किया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने इसकी जानकारी दी। इस फैसले से इन चार देशों के जहाजों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन पाकिस्तान को इस सूची में जगह नहीं मिलने से वहां नाराजगी देखने को मिल रही है।
पाकिस्तान के कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने ईरान के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनकी आपत्ति इस बात को लेकर है कि भारत को रास्ता देने के बावजूद पाकिस्तान को छूट क्यों नहीं दी गई? खासकर तब, जब पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क भी जारी रहे हैं।
भारत को छूट देने के पीछे क्या है ईरान की रणनीति?
ईरानी सांसद अमीर हयात मुकद्दम ने इस फैसले के पीछे अलग-अलग देशों के साथ ईरान के हितों को वजह बताया है। उनके मुताबिक, भारत के जहाजों को रास्ता देने का एक उद्देश्य भारत से दवाइयों का आयात आसान बनाना है। वहीं, चीन के जहाजों को छूट देने के पीछे बीजिंग का राजनीतिक समर्थन हासिल करना है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत और चीन के जहाजों से ईरान ट्रांजिट शुल्क वसूल रहा है, जबकि कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने की अनुमति है। इराकी जहाजों से शुल्क लिया जा रहा है या नहीं, इस बारे में उन्होंने स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
पाकिस्तान को बाहर रखने पर क्यों उठ रहे सवाल?
पाकिस्तान में इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कुछ पाकिस्तानी टिप्पणीकारों और यूजर्स का कहना है कि भारत को छूट देना समझ से परे है, जबकि पाकिस्तान को सूची से बाहर रखा गया है। उनकी दलील है कि भारत के इजरायल के साथ रक्षा और रणनीतिक संबंध हैं, इसके बावजूद ईरान ने भारतीय जहाजों को राहत दी है।
इसके उलट पाकिस्तान ईरान का पड़ोसी देश है और दोनों के बीच कूटनीतिक संबंध भी हैं। पाकिस्तान की ओर से क्षेत्रीय तनाव कम करने और मध्यस्थता की कोशिशों का दावा भी किया जाता रहा है। ऐसे में पाकिस्तानी यूजर्स इस फैसले को अपने देश के लिए कूटनीतिक झटके के तौर पर देख रहे हैं।
हालांकि, ईरान ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा है कि पाकिस्तान को जानबूझकर निशाना बनाकर छूट से बाहर रखा गया है। न ही सांसद ने पाकिस्तान को बाहर रखने की कोई अलग वजह बताई है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज का रास्ता?
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत तेल इसी समुद्री मार्ग से आता है। इसके अलावा भारत के करीब 90 प्रतिशत एलपीजी आयात और आधे से अधिक एलएनजी आयात की आपूर्ति भी इस मार्ग पर निर्भर करती है।
ऐसे में ईरान की छूट से भारतीय जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की संभावना है। हालांकि, क्षेत्र में जारी सैन्य तनाव और समुद्री हमलों के कारण जहाजों की सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
कुल मिलाकर, ईरान का यह फैसला केवल समुद्री आवाजाही से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापार, दवाइयों की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के हित भी जुड़े हैं। पाकिस्तान में उठ रही प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि इस फैसले का असर क्षेत्रीय राजनीति में भी महसूस किया जा रहा है।


