मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने सुप्रीम कोर्ट में करीब 250 पन्नों का संयुक्त हलफनामा दाखिल किया है। इसमें चुनाव आयोग ने कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने जैसी ही है। आयोग ने अपने फैसलों पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आदेशों को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया है।
यह हलफनामा सोमवार, 26 अक्टूबर की देर रात दाखिल किया गया। मामला चुनाव आयोग के कामकाज और मुख्य चुनाव आयुक्त की निर्णय प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 27 अक्टूबर को इन याचिकाओं पर सुनवाई होनी है।
CEC को हटाने के नियम पर आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में संविधान के अनुच्छेद 324(5) का हवाला दिया है। इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। आयोग का तर्क है कि ज्ञानेश कुमार को उनके पद पर काम करने से रोकने की मांग कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है।
आयोग ने यह भी कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप मुख्य रूप से एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित हैं। उसके मुताबिक, रिपोर्ट में वर्णित तथ्यों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया था। इसी आधार पर आयोग ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाए हैं।
SIR के फैसलों पर भी दिया जवाब
हलफनामे में चुनाव आयोग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित तीन प्रमुख आदेश 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को सर्वसम्मति से जारी किए गए थे।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद कई फैसले एकतरफा लिए। आयोग ने जवाब में कहा कि किसी फाइल पर दर्ज सुझाव, टिप्पणी या सवाल अपने आप में आयोग का अंतिम निर्णय नहीं होते। उसके अनुसार, फैसले निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी मंजूरी ली जा सकती है।
फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप पर क्या कहा?
आयोग ने मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया। उसका कहना है कि फॉर्म-6 में संशोधन नहीं किया गया है। SIR से संबंधित घोषणा-पत्र एक अलग दस्तावेज है।
हालांकि, आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में घोषणा-पत्र को जिस तरह दिखाया गया, उससे यह फॉर्म में बदलाव जैसा लग सकता था। इस व्यवस्था को स्पष्ट करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को अलग-अलग दिखाने का निर्णय लिया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
ज्ञानेश कुमार के कामकाज को चुनौती देने वाली याचिकाओं में चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने अपने हलफनामे के जरिए इन आरोपों का जवाब दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और चुनाव आयोग की दलीलों पर विचार करेगा। आयोग का पक्ष दाखिल होने से विवाद का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अदालत का रुख और आगे होने वाली सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि इन आरोपों पर कानूनी कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।


