HomeHindi NewsDelhi Newsफ्रांस की तरह भारत में भी हो रहे प्रयास, विजयादशमी पर बोले...

फ्रांस की तरह भारत में भी हो रहे प्रयास, विजयादशमी पर बोले मोहन भागवत, राजनीति से प्रेरित आंदोलन गलत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देश के प्रति कर्तव्यबोध पर जोर दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान दिए गए इस संबोधन में उन्होंने आंदोलनों के उद्देश्य और उनके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। भागवत ने कहा कि आंदोलन समस्याओं का समाधान करने के लिए होने चाहिए, न कि नई समस्याएं खड़ी करने के लिए। जब किसी आंदोलन का उद्देश्य बदलकर राजनीतिक लाभ हासिल करना हो जाता है, तो वह अपने मूल लक्ष्य से भटक जाता है।

आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए

भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए आंदोलनों की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका उद्देश्य स्पष्ट और सकारात्मक होना चाहिए। उन्होंने युवाओं को विशेष रूप से संदेश देते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और दिशा को समझना जरूरी है। यदि आंदोलन किसी दूसरे लक्ष्य को साधने का माध्यम बन जाए, तो उसका इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया जा सकता है।

उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देश में विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। फ्रांस में हुए प्रदर्शनों और भारत में आंदोलनों को लेकर भी राजनीतिक विमर्श तेज रहा है। भागवत के बयान को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

राष्ट्रनिष्ठा और कर्तव्यबोध पर जोर

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्र के प्रति निष्ठा और कर्तव्य का बोध देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक एकता को मजबूत बनाने और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से बचने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, भारत की परंपरा विविधताओं को स्वीकार करने और पूरे विश्व को परिवार मानने की रही है।

भागवत ने कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं होने के बावजूद एकता की भावना बनाए रखना जरूरी है। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने से ही देश आगे बढ़ सकता है। उन्होंने संतों और समाज सुधारकों के योगदान का उल्लेख करते हुए उनके विचारों से प्रेरणा लेने की बात भी कही।

दुनिया में बढ़ रही भारत की भूमिका

भागवत ने वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत की भूमिका और महत्व बढ़ रहा है। उन्होंने भारतीय परंपरा में निहित विश्वबंधुत्व और विविधता के सम्मान को वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि बदलते समय के साथ समाज को अपनी कार्यशैली में जरूरी बदलाव करने चाहिए। परंपराओं के मूल भाव को बनाए रखते हुए समय के अनुरूप आगे बढ़ना आवश्यक है।

संघ के शताब्दी वर्ष में दिया संदेश

नागपुर के रेशिमबाग मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन और संघ प्रमुख का संबोधन प्रमुख कार्यक्रम रहे। वर्ष 1925 में स्थापित RSS अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के दौर से गुजर रहा है। इस अवसर पर भागवत ने राष्ट्र निर्माण में सामाजिक जिम्मेदारी, आपसी सद्भाव और सक्रिय नागरिक भागीदारी को अहम बताया।

उनके संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि देश की प्रगति के लिए राष्ट्रीय एकता, कर्तव्यनिष्ठा और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन जरूरी हैं। आंदोलनों को भी इसी उद्देश्य के अनुरूप काम करना चाहिए, ताकि वे समाज में स्थायी समाधान लाने का माध्यम बनें, न कि राजनीतिक हितों का साधन।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments