दशहरा 2026 शुभ मुहूर्त: विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया था। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर धर्म और न्याय की स्थापना की थी। दशहरे के अवसर पर देशभर में शस्त्र पूजा, वाहन पूजा और रावण दहन सहित कई धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि इस वर्ष शस्त्र पूजा किस समय करनी चाहिए और रावण दहन के लिए कौन-सा समय शुभ रहेगा।
दशहरा 2026 कब मनाया जाएगा?
विजयादशमी की तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार निर्धारित होती है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। इस दिन लोग भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और अपने आराध्य देव की पूजा करते हैं। कई स्थानों पर शमी वृक्ष की पूजा करने और उसकी पत्तियों को शुभ प्रतीक के रूप में बांटने की भी परंपरा है।
दशहरे का पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश भी देता है।
शस्त्र पूजा का क्या है महत्व?
दशहरे पर शस्त्र पूजा की परंपरा विशेष रूप से क्षत्रिय समुदाय, सैनिकों, पुलिसकर्मियों और सुरक्षा से जुड़े लोगों में प्रचलित है। इसके अलावा कई लोग अपने कार्यस्थल पर इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और वाहनों की भी पूजा करते हैं।
मान्यता है कि विजयादशमी के दिन शस्त्रों की पूजा करने से शक्ति, साहस और विजय का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन शस्त्रों को साफ करके उन पर तिलक लगाया जाता है और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान भगवान से सुरक्षा, सफलता और सद्बुद्धि की प्रार्थना की जाती है।
रावण दहन कब किया जाता है?
दशहरे की शाम को देश के विभिन्न हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। इस आयोजन के माध्यम से बुराई, अहंकार और अन्याय के अंत का संदेश दिया जाता है। कई शहरों में रामलीला के मंचन के बाद रावण दहन होता है, जबकि कुछ स्थानों पर स्थानीय परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
रावण दहन का समय शहर, आयोजन स्थल और स्थानीय कार्यक्रमों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए लोगों को अपने क्षेत्र में आयोजित रामलीला समिति या प्रशासन की ओर से जारी समय-सारणी की जानकारी लेनी चाहिए।
दशहरे पर पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान
विजयादशमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल की सफाई करने के बाद भगवान श्रीराम और मां दुर्गा का स्मरण करें। शस्त्र पूजा करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। वास्तविक हथियारों को संभालने में सावधानी बरतें और बच्चों को उनसे दूर रखें। रावण दहन देखने के लिए निर्धारित सुरक्षित स्थान पर ही खड़े हों और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। दशहरा हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, सत्य और धर्म का मार्ग अंततः विजय की ओर ले जाता है।
सटीक मुहूर्त के अनुसार, 20 अक्टूबर 2026 को दशमी तिथि दोपहर 12:51 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे समाप्त होगी। अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1:14 से 3:30 बजे तक है, जबकि रावण दहन प्रदोष काल में शाम 5:47 बजे के बाद किया जा सकता है। शस्त्र पूजा के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग और रावण दहन के लिए आयोजन समिति की समय-सारणी अवश्य जांचें।


