पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। इस दिन उन पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध किसी कारण से नहीं हो पाया हो। इस साल सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य पिनाकी मिश्रा के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। इनमें काले तिल से लेकर अन्न और जल तक शामिल हैं। आइए जानते हैं इस दिन किन चीजों का दान किया जा सकता है।
1. काले तिल का दान
पितृ कर्म में काले तिल का विशेष महत्व माना गया है। तर्पण के दौरान भी जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर काले तिल का दान करना पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
2. अन्न का करें दान
चावल, गेहूं, आटा, दाल और अन्य खाद्य सामग्री का दान भी इस दिन शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या उसके लिए राशन की व्यवस्था करना भी पुण्यकारी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि अन्नदान से घर में अन्न की कमी नहीं रहती।
3. जल या जलपात्र का दान
जल को जीवन का आधार माना गया है। इसलिए सर्वपितृ अमावस्या पर प्यासे लोगों के लिए पानी की व्यवस्था करना या जलपात्र का दान करना शुभ माना जाता है। पुराणों में भी जलदान के महत्व का उल्लेख मिलता है।
4. शुद्ध घी का दान
इस दिन सामर्थ्य के अनुसार शुद्ध घी का दान भी किया जा सकता है। इसे जरूरतमंद परिवार को देने या भोजन सेवा में इस्तेमाल करने के लिए दान किया जा सकता है। श्राद्ध से जुड़े धार्मिक वर्णनों में घी और घी से बने भोजन के दान का उल्लेख मिलता है।
5. छाता और जूते-चप्पल
जरूरतमंद व्यक्ति को मौसम के अनुसार छाता, जूते या चप्पल जैसी उपयोगी चीजें दान करना भी इस दिन अच्छा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उपयोगी वस्तुओं के दान को महत्व दिया गया है।
6. वस्त्र और 7. फल
सर्वपितृ अमावस्या पर जरूरतमंदों को नए या उपयोग योग्य वस्त्र, जैसे साड़ी, धोती अथवा मौसम के अनुकूल कपड़े दान किए जा सकते हैं। इसके अलावा फल, दूध, गुड़ और सात्विक खाद्य सामग्री भी दान करने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार दान हमेशा अपनी क्षमता के मुताबिक और जरूरतमंद व्यक्ति को करना चाहिए। इस दिन पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण और सेवा कार्य करने से मन में श्रद्धा और सकारात्मकता का भाव बढ़ता है।


