फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कनाडा को यूरोपीय संघ (EU) का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’ बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ उनकी मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, व्यापार और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब कनाडा अमेरिका पर अपनी आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता कम करते हुए यूरोप के साथ रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
सेंट-पियरे-ए-मिकेलॉन में हुई मुलाकात
मैक्रों और कार्नी की मुलाकात रविवार को फ्रांस के सेंट-पियरे-ए-मिकेलॉन क्षेत्र में हुई। यह उत्तरी अटलांटिक में न्यूफाउंडलैंड के पास स्थित फ्रांसीसी क्षेत्र है और कनाडा से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों नेताओं के लिए यह मुलाकात प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इसी के जरिए कनाडा और यूरोप के बीच बढ़ती नजदीकी को प्रदर्शित किया गया।
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस यूरोपीय संघ के साथ कनाडा के करीबी रिश्तों के एजेंडे का समर्थन करता है। उन्होंने कनाडा को EU का एसोसिएट सदस्य बनाने के प्रस्ताव का भी समर्थन किया। कार्नी ने भी यूरोप के साथ इस नई साझेदारी की संभावना का स्वागत किया है।
क्या है एसोसिएट सदस्य बनाने का प्रस्ताव?
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 16 सितंबर को प्रस्ताव दिया था कि कनाडा को EU का पहला ‘एसोसिएट सदस्य’ बनाने की दिशा में काम किया जाए। हालांकि, मौजूदा EU संधियों में ‘एसोसिएट सदस्य’ के लिए कोई औपचारिक दर्जा निर्धारित नहीं है। इसलिए इसे लागू करने के लिए सदस्य देशों के बीच सहमति और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होगी।
वॉन डेर लेयेन ने कनाडा के साथ व्यापार और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए ‘एलायंस फॉर द फ्यूचर’ की बात भी कही थी। इसमें रक्षा उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्कटिक क्षेत्र और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना शामिल है।
रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग पर भी जोर
कार्नी और मैक्रों ने अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्र में साझा ढांचा विकसित करने पर सहमति जताई। दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां और रक्षा मंत्रालय लॉन्च सिस्टम तथा जमीन पर मौजूद रिसेप्शन और कंट्रोल इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित और साझा करने की दिशा में काम करेंगे। इसके अलावा एयरोस्पेस, ऊर्जा, टेलीकम्युनिकेशन, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास पर सहयोग बढ़ाने की बात हुई।
दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों, क्वांटम कंप्यूटिंग, उपग्रह और सुपरकंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
यूरोप की ओर क्यों देख रहा कनाडा?
कनाडा लंबे समय से अमेरिका के साथ गहरे आर्थिक संबंधों पर निर्भर रहा है। लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार और राजनीतिक तनाव बढ़ा है। ऐसे में कार्नी सरकार यूरोप के साथ नए आर्थिक और रणनीतिक विकल्प विकसित करने पर जोर दे रही है। कार्नी का तर्क है कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां कनाडा को किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता से बचा सकती हैं।
मैक्रों ने कनाडा के ऊर्जा संसाधनों को भी यूरोप के लिए महत्वपूर्ण बताया। खास तौर पर कनाडा से यूरोप को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इससे दोनों पक्षों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
हालांकि, कनाडा के EU के साथ रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं। दोनों के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) मौजूद है। प्रस्तावित एसोसिएट सदस्यता इससे कहीं व्यापक राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग की दिशा में कदम हो सकती है, लेकिन इसके लिए आगे लंबी कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।


