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    ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तारी करो, महाराष्ट्र समेत 3 राज्यों में हों दोबारा चुनाव, उद्धव ठाकरे की अजीब मांग

    शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखा हमला बोला है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजने की मांग की। इसके साथ ही ठाकरे ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हाल में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि ये चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए।

    चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट के बाद हमला

    उद्धव ठाकरे की यह मांग चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में कई मौकों पर आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसमें मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े फैसले भी शामिल बताए गए हैं।

    ठाकरे ने दोनों चुनाव आयुक्तों के रुख का हवाला देते हुए कहा कि इससे चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को बल मिला है। उन्होंने मांग की कि आयोग के विवादित बताए जा रहे फैसलों की समीक्षा हो और इस पूरे मामले की जांच कराई जाए।

    महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में फिर चुनाव की मांग

    उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए पिछले विधानसभा चुनावों को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं। ठाकरे ने चुनाव आयोग के फैसलों की जांच की मांग करते हुए अदालत से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की।

    उन्होंने विपक्षी दलों से भी लोकतांत्रिक संस्थाओं के मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया। ठाकरे के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

    मतदाता सूची को लेकर भी आरोप

    ठाकरे ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची में करीब 45 लाख नाम जोड़े गए और बाद में SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 40 लाख नामों पर सवाल उठाए गए या उन्हें हटाने के लिए चिह्नित किया गया। ये आंकड़े ठाकरे द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पहले शिवसेना और बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से जुड़े मामलों में भी ऐसे फैसले लिए, जिन पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। ठाकरे ने इस बात की जांच की मांग की कि क्या चुनाव आयोग पर किसी राजनीतिक या सरकारी स्तर से दबाव था।

    चुनाव आयोग ने मतभेदों पर क्या कहा?

    दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कथित असहमति को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आंतरिक विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं तथा SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

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