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परमाणु हथियारों में न हो AI का इस्तेमाल, आतंकियों तक न पहुंचे तकनीक, UN में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की प्रथम समिति में परमाणु हथियारों को लेकर अपनी नीति दोहराई है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि देश विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध की नीति के साथ ‘नो फर्स्ट यूज’ यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करने के सिद्धांत पर कायम है। उन्होंने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। भारत ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला इंसानों के हाथ में ही रहना चाहिए, खासकर ऐसे समय में जब सैन्य प्रणालियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ रहा है।

क्या है भारत की नो फर्स्ट यूज नीति?

नो फर्स्ट यूज (NFU) का अर्थ है कि भारत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किसी देश के खिलाफ पहले नहीं करेगा। भारत की घोषित परमाणु नीति में विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध और परमाणु हथियार रहित देशों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने का सिद्धांत भी शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र में मनीष तिवारी ने भारत को एक जिम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश बताते हुए कहा कि उसकी रक्षा क्षमताएं देश की विशिष्ट सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप हैं और किसी विशेष देश को निशाना बनाने के लिए तैयार नहीं की गई हैं। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक और एकतरफा रोक जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए कानूनी ढांचे की मांग

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लक्ष्य को दोहराते हुए ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की, जो सभी देशों पर समान रूप से लागू हो और जिसके पालन की पुष्टि की जा सके। भारतीय पक्ष के मुताबिक, परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए केवल राजनीतिक घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए साझा प्रतिबद्धता और प्रभावी बहुपक्षीय कानूनी ढांचा भी जरूरी है।

तिवारी ने कहा कि भारत पहले भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि की दिशा में बातचीत शुरू करने की मांग करता रहा है। भारत का मानना है कि परमाणु हथियार रहित देशों को परमाणु हमले या उसकी धमकी से कानूनी सुरक्षा देने वाले आश्वासन वैश्विक असुरक्षा कम करने में मदद कर सकते हैं।

परमाणु कमान में AI के इस्तेमाल पर चिंता

मनीष तिवारी ने परमाणु हथियारों की कमान और नियंत्रण प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय मनुष्यों द्वारा लिया जाना चाहिए। आधुनिक तकनीक से सैन्य क्षमताएं बढ़ने के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी तकनीकी गड़बड़ी, गलत आकलन या अनजाने में हुई कार्रवाई से परमाणु संघर्ष का खतरा न पैदा हो।

भारत ने इस संदर्भ में परमाणु हथियारों को तत्काल इस्तेमाल के लिए तैयार रखने से जुड़े जोखिमों को कम करने और अनजाने या आकस्मिक इस्तेमाल की आशंका घटाने के उपायों का समर्थन किया।

आतंकियों तक न पहुंचे संवेदनशील तकनीक

भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण के साथ सामूहिक विनाश के हथियारों और उनसे जुड़ी संवेदनशील तकनीक के आतंकवादी संगठनों के हाथों में पहुंचने के खतरे पर भी चिंता जताई है। भारतीय पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई।

भारत लंबे समय से परमाणु हथियारों के वैश्विक उन्मूलन की वकालत करता रहा है। उसका पक्ष है कि निरस्त्रीकरण की व्यवस्था निष्पक्ष होनी चाहिए और सभी देशों की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

भारत के रुख का क्या है महत्व?

संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से दोहराया गया यह रुख ऐसे समय आया है, जब परमाणु हथियारों और नई सैन्य तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बनी हुई हैं। भारत ने एक ओर अपनी सुरक्षा के लिए विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध की नीति पर जोर दिया, वहीं दूसरी ओर वैश्विक निरस्त्रीकरण और परमाणु जोखिमों को कम करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

इस बयान के जरिए भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी घोषित नीति में परमाणु प्रतिरोध, पहले इस्तेमाल नहीं करने का सिद्धांत और परमाणु हथियार रहित देशों के खिलाफ इनके इस्तेमाल से परहेज प्रमुख तत्व हैं। साथ ही, भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कानूनी उपायों का समर्थन करता है, जिनसे परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा कम हो और दीर्घकाल में इनके पूर्ण उन्मूलन की दिशा में प्रगति की जा सके।

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