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पंजाब में शिअद से गठबंधन अंतिम दौर में? इतनी सीटों पर चुनाव लड़ सकती है BJP?

पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच फिर से गठबंधन की संभावनाएं चर्चा में हैं। दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की खबर है। माना जा रहा है कि यदि सीटों के बंटवारे पर सहमति बन जाती है, तो दीपावली के बाद गठबंधन की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। संभावित समझौते के तहत भाजपा पंजाब की करीब 40 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

हालांकि, सीटों के बंटवारे और गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि के लिए दोनों दलों की ओर से औपचारिक घोषणा का इंतजार करना होगा। फिलहाल सामने आ रही जानकारी को संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

सीटों के बंटवारे पर टिकी नजरें

भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा सीटों का बंटवारा है। पंजाब की विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। ऐसे में भाजपा के लिए 40 सीटों का संभावित आंकड़ा गठबंधन की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा सकता है। शेष सीटों पर किस दल के उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे, यह अंतिम समझौते के बाद ही स्पष्ट होगा।

सीटों की संख्या के अलावा उम्मीदवारों के चयन, क्षेत्रीय प्रभाव और चुनाव प्रचार की साझा रणनीति जैसे मुद्दे भी गठबंधन की शर्तों को प्रभावित कर सकते हैं। दोनों दलों के बीच बातचीत का नतीजा आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा तय करने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है।

पहले भी साथ चुनाव लड़ चुके हैं दोनों दल

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का पंजाब में पुराना राजनीतिक गठबंधन रहा है। दोनों दलों ने लंबे समय तक मिलकर चुनाव लड़े और राज्य की राजनीति में साथ काम किया। हालांकि, वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को लेकर अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का फैसला किया था। उस समय पंजाब में किसान आंदोलन एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ था।

इसके बाद दोनों दलों के राजनीतिक रास्ते अलग हो गए और उन्होंने अलग-अलग चुनावी रणनीतियों के साथ अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं। ऐसे में दोबारा गठबंधन की संभावना राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पंजाब के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है असर

यदि दोनों दलों के बीच गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो इसका असर पंजाब में चुनावी मुकाबले, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार अभियान पर दिखाई दे सकता है। गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा तय होने से दोनों पार्टियों को अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि भाजपा और अकाली दल के बीच सीटों की संख्या को लेकर अंतिम सहमति कब बनती है और क्या दीपावली के बाद इसकी आधिकारिक घोषणा होती है। जब तक दोनों दलों की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की जाती, तब तक 40 सीटों का आंकड़ा संभावित समझौते के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

भाजपा की ओर से अधिक सीटों की मांग

रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा उन विधानसभा क्षेत्रों में अधिक सीटें चाहती है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन अकाली दल से बेहतर रहा था। इसी आधार पर पार्टी करीब 45 सीटों पर दावा कर रही थी, जबकि मौजूदा चर्चा में लगभग 40 सीटों का आंकड़ा सामने आया है।

इस बीच गठबंधन को मजबूत बनाने के लिए अकाली दल के पुराने नेताओं और अलग हुए गुटों को साथ लाने की चर्चा भी अहम है। दोनों दलों के बीच इस विषय पर क्या सहमति बनती है, यह औपचारिक घोषणा के समय स्पष्ट हो सकता है।

कुल मिलाकर, पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और अकाली दल के संभावित गठबंधन पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। हालांकि, सीटों का अंतिम बंटवारा, गठबंधन की शर्तें और दोनों दलों की साझा रणनीति अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है। इसलिए दीपावली के बाद होने वाली संभावित घोषणा पर सबकी नजर रहेगी।

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