गुजरात की साबरमती जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में हुई फायरिंग के बाद उसके गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, जेल में बंद होने के बावजूद बिश्नोई से जुड़े आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियां जारी हैं। बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क को विदेश में मौजूद सहयोगियों और भारत में सक्रिय स्थानीय सदस्यों के जरिए संचालित किया जाता है। मीडिया रिपोर्टों में इस व्यवस्था को ‘शैडो कैबिनेट’ कहा गया है।
दो समूहों में बंटा बताया जा रहा नेटवर्क
रिपोर्टों के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में आठ प्रमुख नामों का जिक्र किया गया है। इनमें टाइसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हरि बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत शामिल हैं। वहीं, दूसरे समूह में आरजू बिश्नोई, शुभम लोणकर और रणदीप मलिक के नाम बताए गए हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पहला समूह नए लोगों को जोड़ने, स्थानीय सहयोगियों के साथ संपर्क बनाए रखने और कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए संसाधनों की व्यवस्था करने जैसे कामों से जुड़ा है। दूसरे समूह पर योजना बनाने, वित्तीय व्यवस्था और संभावित निशानों की पहचान से संबंधित भूमिकाएं निभाने के आरोप हैं। हालांकि, इन भूमिकाओं और नेटवर्क की संरचना से जुड़ी जानकारियों को जांच एजेंसियों के दावों और मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ की क्या भूमिका?
लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े नेटवर्क की चर्चा में रोहित गोदारा और गोल्डी बराड़ के नाम भी प्रमुखता से सामने आते रहे हैं। दोनों को अलग-अलग आपराधिक मामलों और कथित अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों की जांच में महत्वपूर्ण सहयोगी बताया गया है।
अमेरिकी जांच एजेंसियों ने गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा को बिश्नोई के वरिष्ठ सहयोगियों के रूप में उल्लेखित किया है। हालांकि, गिरोह के भीतर कथित मतभेदों और अलग-अलग गुटों की खबरें भी सामने आती रही हैं। इसलिए पूरे नेटवर्क पर किसी एक व्यक्ति के नियंत्रण को लेकर सभी दावों को स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया से धमकी और जिम्मेदारी लेने के आरोप
इस नेटवर्क की चर्चा में अनिल पंडित का नाम भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में उसे गिरोह की ओर से सोशल मीडिया पर बयान जारी करने और कुछ वारदातों की जिम्मेदारी लेने वाले व्यक्ति के रूप में बताया गया है। जांच एजेंसियां कथित तौर पर यह भी पड़ताल कर रही हैं कि विदेश में बैठे सहयोगी भारत में मौजूद लोगों के साथ किस तरह संपर्क बनाए रखते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर संपर्क और निर्देश देने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी विशेष घटना में किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी, इसका निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
जांच एजेंसियों के सामने क्या है चुनौती?
इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क की जांच में केवल मुख्य आरोपी तक पहुंचना पर्याप्त नहीं होता। कथित वित्तीय लेनदेन, हथियारों की आपूर्ति, स्थानीय सहयोगियों, डिजिटल संपर्कों और विदेश में मौजूद संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल करनी पड़ती है।
अमेरिका और कनाडा में भी बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं। इससे स्पष्ट है कि मामले का दायरा भारत तक सीमित नहीं है। फिलहाल, ‘शैडो कैबिनेट’ की पूरी संरचना और इसमें शामिल बताए जा रहे लोगों की भूमिकाओं को लेकर जांच एजेंसियों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।


