पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया है। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार, 17 अक्टूबर की शाम हुए हादसे में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए। घटना के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। साथ ही हादसे की जांच कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई वाली विशेष जांच टीम (SIT) से कराने की बात कही है। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने हादसे को लेकर मुख्यमंत्री और आयोजन समिति पर सवाल उठाए हैं।
मृतकों के परिवार को 25 लाख रुपये और सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का एलान किया है। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार ने उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की भी बात कही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की है।
जज की अगुवाई में जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे की जांच में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और आयोजन के दौरान हुई संभावित लापरवाही की पड़ताल की जाएगी। SIT में पुलिस और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। आयोजकों, निजी सुरक्षा कर्मियों और ड्यूटी पर तैनात लोगों से पूछताछ की जा रही है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भीड़ को नियंत्रित करने में लापरवाही करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने भारी भीड़ जुटाने वाले कुछ प्रमुख पूजा पंडालों में आम लोगों की एंट्री अस्थायी रूप से रोकने की सलाह भी दी है। पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और भीड़ के आवागमन को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
बारिश और भीड़ के बीच कैसे मची भगदड़?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पंडाल के बाहर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। बारिश शुरू होने के बाद भीड़ में अचानक दबाव बढ़ा और लोग आगे की ओर बढ़ने लगे। इसी दौरान कुछ लोगों के गिरने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। मुख्यमंत्री ने आयोजकों की ओर से की गई एक घोषणा के बाद भीड़ में अचानक हलचल बढ़ने की बात भी कही है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
TMC के ममता गुट ने उठाए सवाल
हादसे के बाद तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी समर्थक गुट ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधा है। इस गुट की ओर से आयोजन समिति के मुख्य संरक्षक को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि समिति के मुख्य संरक्षक के रूप में मुख्यमंत्री के भतीजे का नाम जुड़ा है। इस दावे और आयोजन समिति की जिम्मेदारियों को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
हालांकि, हादसे में किसी व्यक्ति या समिति की जिम्मेदारी अभी जांच का विषय है। ऐसे में राजनीतिक आरोपों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
कोलकाता की इस घटना ने दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षित प्रवेश-निकास, बारिश के दौरान आपात व्यवस्था और पुलिस की तैनाती पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हादसे के पीछे किन परिस्थितियों और संभावित लापरवाहियों की भूमिका रही।


