जिंदगी में मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर हौसला और मेहनत का साथ बना रहे तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता निकल ही आता है। पंजाब के मोगा के रहने वाले दीपांशु जिंदल की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कम उम्र में माता-पिता को खोने का दर्द, अकेलेपन की चुनौती और यूपीएससी की परीक्षा में दो बार मिली असफलता भी उनके इरादे नहीं डिगा सकी। बड़ी बहन के सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर दीपांशु ने तीसरे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 38 हासिल की। उनकी कहानी संघर्ष के बीच उम्मीद बनाए रखने की प्रेरणा देती है।
12वीं में थे, तभी पिता को हुआ कैंसर
दीपांशु जिंदल पंजाब के मोगा जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता इंजीनियर थे, जबकि मां घर संभालती थीं। परिवार में उनकी बड़ी बहन भी थीं, जो खुद भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी हैं। दीपांशु ने भी सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था, लेकिन उनके जीवन में मुश्किल दौर उस समय शुरू हुआ, जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रहे थे।
इसी दौरान उनके पिता को कैंसर हो गया। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। पिता की बीमारी और पढ़ाई के बीच दीपांशु को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बाद में उनके पिता का निधन हो गया। इस सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि करीब दो महीने बाद उनकी मां का भी निधन हो गया।
कोविड के दौरान अकेलेपन से लड़ी जंग
माता-पिता को खोने के बाद दीपांशु के सामने भावनात्मक चुनौती के साथ जीवन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी थी। कोविड महामारी के दौरान वह घर में अकेले रह गए थे। ऐसे समय में उनकी बड़ी बहन उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बनीं।
दीपांशु की बहन उनसे करीब पांच साल बड़ी हैं। उन्होंने मुश्किल दौर में भाई को संभाला और उसे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का हौसला दिया। बहन का मार्गदर्शन दीपांशु के लिए अहम साबित हुआ। उन्होंने अपने माता-पिता के सपने को पूरा करने का संकल्प बनाए रखा।
दो बार असफलता मिली, फिर भी नहीं मानी हार
दीपांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से पढ़ाई की और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। हालांकि, यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता उन्हें पहली बार में नहीं मिली। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता का सामना करना पड़ा।
लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। अपनी कमियों को समझने और उनमें सुधार करने की कोशिश जारी रखी। आखिरकार तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई।
तीसरे प्रयास में मिली 38वीं रैंक
दीपांशु जिंदल ने वर्ष 2025 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 38 हासिल की। इस सफलता के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा हुआ। यह उपलब्धि उनके लिए केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि निजी जीवन की कठिन परिस्थितियों से उबरकर अपने लक्ष्य तक पहुंचने का परिणाम भी है।
दीपांशु की कहानी बताती है कि असफलता किसी सफर का अंत नहीं होती। सही दिशा में लगातार प्रयास, परिवार का सहयोग और खुद पर विश्वास मुश्किल समय में आगे बढ़ने की ताकत दे सकते हैं।


