मिठाई में कितना खोया, चीनी और दूध… तय होगा मानक, गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर अब खाद्य नियामक सख्ती की तैयारी में
नई दिल्ली। त्योहारों के मौसम में बाजार में बिकने वाली मिठाइयों की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर अब खाद्य नियामक सख्ती की तैयारी में है। मिठाई में कितना खोया, दूध, चीनी और अन्य सामग्री इस्तेमाल होनी चाहिए, इसके लिए स्पष्ट और एक समान मानक तय किए जा सकते हैं। संसदीय समिति ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने का सुझाव दिया है। समिति ने खाद्य प्रतिष्ठानों की पूरे साल नियमित जांच पर भी जोर दिया है।
मिठाई की संरचना का बनेगा स्पष्ट मानक
अभी अलग-अलग तरह की पारंपरिक मिठाइयों में सामग्री का अनुपात बनाने की प्रक्रिया और स्थानीय परंपरा के अनुसार बदलता है। समिति का सुझाव है कि मिठाइयों की संरचना को लेकर स्पष्ट मानक होने चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल सामग्री के बारे में बेहतर जानकारी मिल सके।
एफएसएसएआई पहले से भारतीय मिठाइयों को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है। इनमें खोया आधारित, छेना आधारित, फर्मेंटेड मिल्क प्रोडक्ट आधारित और अन्य दूध आधारित मिठाइयां शामिल हैं। खोया आधारित मिठाइयों में खोया, चीनी या कृत्रिम स्वीटनर, आटा, तेल, घी और अन्य सामग्री का इस्तेमाल हो सकता है।
तुकाराम मुंढे ने दिए 25 सुझाव
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख तुकाराम मुंढे की ओर से समिति के सामने दूध और दूध से बने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने तथा मिलावट रोकने से जुड़े 25 सुझाव रखे गए। इनमें केवल तैयार दूध या दूध उत्पादों की जांच ही नहीं, बल्कि उनकी पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
एक अहम सुझाव पशु आहार को भी निगरानी के दायरे में लाने का है। इसके पीछे तर्क यह है कि पशु जो आहार लेते हैं, उसका असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसलिए दूध की जांच के साथ पशु आहार की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है।
पनीर के नाम पर गैर-दुग्ध उत्पाद बेचने पर रोक
दूध उत्पादों में मिलावट और गलत लेबलिंग को लेकर भी एफएसएसएआई ने कदम बढ़ाया है। प्राधिकरण ने गैर-दुग्ध सामग्री से बने पनीर जैसे उत्पादों को पनीर के नाम से बेचने पर रोक से संबंधित मसौदा नियम जारी किया है। एफएसएसएआई की 24 सितंबर की अधिसूचना में दूध से प्राप्त न होने वाले घटकों से बने पनीर पर प्रतिबंध से जुड़ा मसौदा शामिल है।
इसका मतलब है कि सोया, पाम ऑयल, वनस्पति वसा या दूसरी गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार उत्पाद को पनीर के नाम से बेचने या प्रचारित करने पर नियम लागू हो सकते हैं। इस मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं, जिसके बाद अंतिम नियम तय किए जाएंगे।
पूरे साल जांच पर जोर
संसदीय समिति ने खाद्य प्रतिष्ठानों की निगरानी केवल त्योहारों तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल नियमित जांच करने की जरूरत बताई है। एफएसएसएआई की अपनी गाइडलाइन में भी दूध से बनी मिठाइयों की सीमित शेल्फ लाइफ और माइक्रोबियल वृद्धि के जोखिम का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से दूध आधारित मिठाइयों की शेल्फ लाइफ आमतौर पर कम होती है, इसलिए साफ-सफाई, सुरक्षित तैयारी और उचित भंडारण महत्वपूर्ण हैं।
एफएसएसएआई के अनुसार पारंपरिक मिठाइयों के क्षेत्र में खराब गुणवत्ता वाले कच्चे माल, स्वच्छता, लेबलिंग और कुछ मामलों में गैर-अनुमत रंग या सामग्री के इस्तेमाल जैसी चुनौतियां रही हैं। ऐसे में प्रस्तावित मानकों और नियमित निरीक्षण का उद्देश्य मिठाई की गुणवत्ता के साथ उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करना है।
कुल मिलाकर, मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले दूध, खोया, चीनी और अन्य सामग्री के अनुपात को लेकर स्पष्ट मानक बनाने की पहल से निर्माताओं और विक्रेताओं के लिए नियम अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। वहीं उपभोक्ताओं के लिए भी यह जानना आसान हो सकता है कि किसी मिठाई में वास्तव में कौन-कौन सी सामग्री और किस प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया गया है।


