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क्या पूरी दुनिया में ठप हो जाएगा इंटरनेट? ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी तारें काटने की दी धमकी, कितना पड़ेगा असर?

अमेरिका और इजरायल के साथ संभावित सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एक ऐसे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिस पर दुनिया का डिजिटल कारोबार टिका है। यह है समुद्र के नीचे बिछा इंटरनेट केबल नेटवर्क। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की योजनाएं तैयार की हैं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि हमला होने की स्थिति में केबलों को नुकसान पहुंचाने के साथ उनकी मरम्मत में भी बाधा डाली जा सकती है।

यह चेतावनी इसलिए गंभीर है, क्योंकि आधुनिक दुनिया में बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, क्लाउड सेवाएं, वीडियो कॉल, ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल बेहद महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में केबल काटने से पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा।

समुद्र के नीचे क्यों बिछी हैं इंटरनेट की तारें?

दुनिया के देशों के बीच इंटरनेट डेटा का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबलों से गुजरता है। इन केबलों के भीतर बेहद पतले कांच के रेशों के जरिए प्रकाश संकेतों के रूप में डेटा भेजा जाता है। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा समुद्री केबलों के माध्यम से संचालित होता है।

खाड़ी क्षेत्र में ये केबल भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच डिजिटल संपर्क बनाए रखने में मदद करते हैं। इनमें एशिया-अफ्रीका-यूरोप-1 (AAE-1), फाल्कन (FALCON) और गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल (GBI) जैसे नेटवर्क शामिल हैं।

क्या इंटरनेट पूरी दुनिया में ठप हो जाएगा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली केबलों पर हमला होने से वैश्विक इंटरनेट पूरी तरह बंद होने की आशंका कम है। इस क्षेत्र से दुनिया की कुल अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां केबल कटने का असर वैश्विक स्तर की तुलना में खाड़ी देशों पर कहीं अधिक गंभीर हो सकता है।

फिर भी, अगर एक साथ कई केबल क्षतिग्रस्त हो जाएं और मरम्मत में लंबे समय तक देरी हो, तो स्थिति मुश्किल हो सकती है। वैकल्पिक नेटवर्क पर डेटा का दबाव बढ़ने से इंटरनेट की गति धीमी हो सकती है और कुछ सेवाओं में रुकावट आ सकती है।

खाड़ी देशों में सबसे ज्यादा खतरा

ईरान की इस धमकी का सबसे सीधा असर बहरीन, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों पर पड़ सकता है। इन देशों की अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए खाड़ी से गुजरने वाले समुद्री केबल अहम हैं। इंटरनेट बाधित होने पर ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, कारोबार और क्लाउड कंप्यूटिंग पर असर पड़ सकता है।

खासतौर पर उन कंपनियों को परेशानी हो सकती है, जो दूसरे देशों में मौजूद सर्वर और डेटा सेंटर पर निर्भर हैं। इंटरनेट कनेक्टिविटी में लंबी रुकावट से कारोबार की लागत बढ़ सकती है और वित्तीय लेनदेन प्रभावित हो सकते हैं।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है, क्योंकि समुद्री केबल भारत को खाड़ी देशों और अन्य अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। फाल्कन जैसे केबल नेटवर्क भारत और श्रीलंका को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ने में भूमिका निभाते हैं।

यदि इन मार्गों पर गंभीर नुकसान होता है, तो कुछ अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट सेवाओं की गति और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत का इंटरनेट पूरी तरह बंद हो जाएगा। प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-से केबल क्षतिग्रस्त हुए हैं और वैकल्पिक नेटवर्क कितनी क्षमता संभाल सकते हैं।

केबलों की मरम्मत क्यों होगी मुश्किल?

समुद्र के नीचे बिछी केबलों की मरम्मत सामान्य परिस्थितियों में भी आसान नहीं होती। इसके लिए विशेष जहाजों और तकनीकी उपकरणों की जरूरत पड़ती है। युद्ध की स्थिति में समुद्र में आवाजाही का खतरा, बीमा लागत और संबंधित देशों से अनुमति मिलने में देरी मरम्मत प्रक्रिया को लंबा खींच सकती है।

ईरानी अधिकारियों की चेतावनी में मरम्मत रोकने की बात भी शामिल है। यदि केबलों की बहाली लंबे समय तक नहीं हो पाती, तो क्षेत्रीय डिजिटल सेवाओं पर असर और गहरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, ईरान की धमकी का सबसे बड़ा खतरा पूरी दुनिया का इंटरनेट बंद करना नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के डिजिटल नेटवर्क को बाधित करना है। यदि सैन्य संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर इंटरनेट सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय कारोबार तक पहुंच सकता है।

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