दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़े सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई किया जा चुका था, तो दोनों नेता वहां प्रदर्शन करने क्यों पहुंचे? अदालत ने यह भी सवाल किया कि वे जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेने के बजाय प्रतिबंधित स्थल पर क्यों गए।
न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ के समक्ष हुई सुनवाई में अदालत ने प्रदर्शन के तरीके और उसके संभावित परिणामों पर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान अदालत ने फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद हुई आगजनी और लूटपाट का भी उल्लेख किया। अदालत की टिप्पणी थी कि इस तरह से बैरिकेड पार करने या वहां पहुंचने की कोशिश से दूसरे लोगों को भी कानून तोड़ने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
‘आप जेनजी तो नहीं’, उम्र और संगठन के मकसद पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं की उम्र पूछी। जब अदालत को बताया गया कि उनकी उम्र 27 और 31 वर्ष है, तो पीठ ने टिप्पणी की, ‘फिर आप जेनजी नहीं हैं।’ अदालत ने सवाल उठाया कि शुरुआत में प्रदर्शन छात्रों के आंदोलन के तौर पर सामने आया था, लेकिन अब उसका उद्देश्य बदलकर राजनीतिक मांगों और सत्ता परिवर्तन की बातों तक पहुंचता दिख रहा है।
अदालत ने संगठन की पहचान, उद्देश्य और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल किए। पीठ ने कहा कि जब शांति भंग होने की आशंका जताई जाती है, तब संगठन की प्रकृति और उसके उद्देश्य जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो जाते हैं। अदालत ने यह भी पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने के अगले ही दिन कथित तौर पर उसका उल्लंघन करने पर प्रशासन सख्त शर्तें क्यों नहीं लगा सकता।
जंतर-मंतर पहुंचने पर हुई थी गिरफ्तारी
सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों नेताओं ने कथित तौर पर बंद गेट पार कर प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया था। उस समय वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दे उठा रहे थे।
दोनों को पहले पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बाद में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था।
हालांकि, हाईकोर्ट की टिप्पणियों और वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध होने की बात सामने आने के बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। अब उनकी रिहाई और हिरासत से जुड़ा मामला संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष आगे बढ़ना है।
इस मामले में एक ओर CJP नेताओं ने हिरासत को चुनौती देते हुए व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का सवाल उठाया है, वहीं अदालत ने प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी पर जोर दिया है।


