देश के प्रमुख सेब उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में इस बार मौसम ने बागवानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, तेज हवाओं और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सेब की पैदावार में बड़ी गिरावट आई है। उत्पादन कम होने का सीधा असर मंडियों में सेब की आवक पर पड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में अच्छी गुणवत्ता वाले सेब की कीमतें बढ़ने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। सामान्य वर्षों में प्रदेश में करीब 20 से 22 लाख टन सेब का उत्पादन होता है, लेकिन इस बार यह घटकर लगभग 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी कुल उत्पादन में करीब 30 से 40 फीसदी तक की कमी हो सकती है। कुछ इलाकों में नुकसान इससे भी ज्यादा है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां और कुलगाम के ऊपरी क्षेत्रों में मई-जून के दौरान हुई ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसल को 45 से 55 फीसदी तक नुकसान पहुंचा।
बडगाम, पुलवामा और आसपास के पारंपरिक सेब उत्पादक इलाकों में भी परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप का असर पड़ा। इससे पेड़ों से फल गिरने लगे और कई बागानों में पैदावार करीब आधी रह गई। वहीं, कुपवाड़ा और बारामुला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक तापमान गिरने से फलों के आकार और वजन पर असर पड़ा।
हिमाचल प्रदेश में भी हालात सामान्य नहीं रहे। पिछले सीजन में राज्य में करीब सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल उत्पादन 3.5 से 3.75 लाख टन के आसपास रहने का अनुमान है। प्रदेश में इस बार ड्रॉपिंग ज्यादा रही और सेब सीजन करीब 15 दिन की देरी से शुरू हुआ। हालांकि अंतिम आंकड़े सीजन पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
मौसम की मार का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं है। कम फसल के कारण मंडियों में आपूर्ति घट गई है और खासकर ए-ग्रेड सेब की कमी देखी जा रही है। सोपोर फ्रूट मंडी के व्यापारियों के मुताबिक, शोपियां और कुलगाम से आने वाले गुणवत्तापूर्ण सेब की मात्रा काफी कम है। दूसरी ओर, दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब जैसे बड़े बाजारों से मांग बनी हुई है। ऐसे में मांग और आपूर्ति का अंतर कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
बागवानों के लिए कम उत्पादन के साथ बढ़ती लागत भी बड़ी चुनौती है। खाद, कीटनाशक, पैकेजिंग और मजदूरी पर खर्च बढ़ने के बीच फसल घटने से उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। कुछ क्षेत्रों में बागवान अब सेब के साथ अन्य फलों की खेती की ओर भी रुख करने पर विचार कर रहे हैं।
हिमाचल के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन को सेब उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बताया है। उनके अनुसार हाई-डेंसिटी पौधरोपण, आधुनिक तकनीक और नए रूट स्टॉक जैसे उपायों को अपनाना जरूरी हो गया है।
कुल मिलाकर, इस सीजन में सेब की कम पैदावार का असर बागवानों से लेकर व्यापारियों और उपभोक्ताओं तक दिखाई दे सकता है। अगर मंडियों में आवक कम बनी रहती है और मांग मजबूत रहती है, तो अच्छी गुणवत्ता वाले सेब के दाम ऊंचे रह सकते हैं।


