भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी की आक्रामक बल्लेबाजी ने कम उम्र में ही सबका ध्यान खींचा है। लेकिन इन दिनों उनके प्रदर्शन से ज्यादा चर्चा टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर हो रही है। 15 वर्षीय बल्लेबाज को वीवीएस लक्ष्मण के मार्गदर्शन में जहां लगातार खेलने का मौका मिला, वहीं गौतम गंभीर के मुख्य कोच रहते हुए उन्हें इंतजार करना पड़ा। आंकड़ों में सामने आए इस अंतर ने टीम प्रबंधन की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लक्ष्मण के मार्गदर्शन में वैभव ने पांच मुकाबले खेले और सभी में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा रहे। इसके उलट, गंभीर के मुख्य कोच रहते हुए वह 14 मैचों के दौरान टीम का हिस्सा बने, लेकिन सिर्फ तीन मुकाबलों में उन्हें खेलने का अवसर मिला। यानी लक्ष्मण के कार्यकाल में उन्हें 100 प्रतिशत मैचों में मौका मिला, जबकि गंभीर के कार्यकाल में यह आंकड़ा करीब 21 प्रतिशत रहा।
लक्ष्मण के साथ क्यों मिले लगातार मौके?
वैभव को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआती अवसर जिम्बाब्वे दौरे पर मिले थे। उस दौरान वीवीएस लक्ष्मण भारतीय टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वैभव ने इस सीरीज में लगातार तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। इसके बाद एशियाई खेलों में भी उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।
इन मुकाबलों में वैभव को लगातार खेलने का अवसर मिलने के पीछे टीम संयोजन की भूमिका भी अहम रही। जिम्बाब्वे दौरे पर संजू सैमसन टीम में नहीं थे, जिससे सलामी बल्लेबाजी में जगह बनी। वहीं, एशियाई खेलों में भारतीय टीम का संयोजन भी अलग था। ऐसे में वैभव को मैदान पर उतरने का मौका मिला।
गंभीर के कार्यकाल में क्यों करना पड़ा इंतजार?
गौतम गंभीर के मुख्य कोच रहते हुए वैभव को इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका मिला था। उन्होंने इस सीरीज में तीन मुकाबले खेले। हालांकि, इसके बाद आयरलैंड, अफगानिस्तान और वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली।
इसकी एक प्रमुख वजह भारतीय टीम का मजबूत शीर्ष क्रम माना जा रहा है। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे बल्लेबाज ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। टीम प्रबंधन के सामने स्थापित खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखने और युवा प्रतिभा को अवसर देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।
186 से ज्यादा स्ट्राइक रेट, फिर भी बेंच पर वैभव
वैभव की चर्चा की एक बड़ी वजह उनका आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वह भारत के लिए आठ टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 246 रन बना चुके हैं और उनका स्ट्राइक रेट 186 से अधिक रहा है। उनकी बल्लेबाजी की खासियत पहली गेंद से ही तेजी से रन बनाने की क्षमता है।
इसके बावजूद, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नियमित जगह बनाने के लिए निरंतरता, परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी और टीम की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाता है। केवल स्ट्राइक रेट के आधार पर किसी खिलाड़ी के चयन का फैसला नहीं होता।
क्या वैभव को मिलना चाहिए नियमित मौका?
वैभव को लेकर असली सवाल यह है कि टीम प्रबंधन उन्हें किस भूमिका में और कब नियमित अवसर देना चाहता है। अभ्यास और वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम में समय बिताने से अनुभव जरूर मिलता है, लेकिन मैच का दबाव अलग होता है। लगातार मौके मिलने से युवा बल्लेबाज की क्षमताओं का बेहतर आकलन भी किया जा सकता है।
हालांकि, लक्ष्मण और गंभीर के कार्यकाल के आंकड़े अपने आप में दोनों की रणनीतियों का पूरा आकलन नहीं हैं। अलग-अलग सीरीज, उपलब्ध खिलाड़ी और टीम की जरूरतें चयन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में वैभव को कम मौके मिलने को केवल किसी एक कोच की पसंद या नापसंद से जोड़ना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, इस तुलना ने भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा और अनुभव के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन वैभव को आगे कितने अवसर देता है और 15 वर्षीय बल्लेबाज उन मौकों का किस तरह फायदा उठाता है।


