उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी (SP) और उसके PDA समीकरण को लेकर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के वोट मांगती है, लेकिन चुनाव में टिकट अपने परिवार के लोगों और बड़े पूंजीपतियों को देती है। उनका यह बयान सपा की ओर से राज्यसभा चुनाव के लिए दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाने के बाद आया है।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट के जरिए सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बसपा छोटे-बड़े किसी भी चुनाव में बड़े पूंजीपतियों या धनाढ्य लोगों को टिकट नहीं देती। उनके मुताबिक, पार्टी गरीब, मध्यम वर्ग और कमजोर तबकों के मेहनती कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाने पर जोर देती है। मायावती ने इसे बसपा की राजनीति का आधार बताते हुए सपा पर इसके उलट काम करने का आरोप लगाया।
रामगोपाल यादव और धनराज नथवानी का जिक्र
मायावती ने अपने आरोप के समर्थन में सपा के राज्यसभा उम्मीदवारों का उदाहरण दिया। सपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और उद्योग जगत से जुड़े धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। रामगोपाल यादव सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीबी रिश्तेदार हैं और लंबे समय से पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वहीं धनराज नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी हैं।
मायावती ने इसी चयन को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सपा खुद को PDA और समाजवादी विचारधारा वाली पार्टी बताती है, लेकिन उसके उम्मीदवारों के चयन में परिवार और पूंजी का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने दावा किया कि सपा चुनावों में PDA के नाम पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों से समर्थन मांगती है, जबकि सांसद और विधायक बनाने के मामले में परिवार तथा बड़े पूंजीपतियों को प्राथमिकता देती है। ये आरोप मायावती के हैं; सपा की ओर से इन आरोपों पर अलग प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए PDA सामाजिक समीकरण को लेकर सपा लगातार सक्रिय है। जुलाई में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सपा सामान्य सीटों पर भी दलित उम्मीदवारों को उतारने की रणनीति पर काम कर रही थी। दूसरी ओर, मायावती की बसपा भी दलितों के साथ मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के बीच अपना सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
मायावती ने अपने बयान में दलित, आदिवासी, अति-पिछड़े, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से चुनाव से पहले सतर्क रहने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के हितों के लिए बसपा की राजनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह उनका राजनीतिक दावा है, जबकि आगामी चुनाव में विभिन्न दलों की रणनीतियां और उम्मीदवार चयन अभी आगे भी बदल सकते हैं।
राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर शुरू हुई यह जुबानी जंग अब उत्तर प्रदेश की व्यापक चुनावी राजनीति से भी जुड़ती दिख रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर राजनीतिक संदेशों की लड़ाई आगे और तेज होने की संभावना है।


