फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि क्या विमान के सह-पायलट ने यह हमला अकेले किया था या इसके पीछे किसी और की भूमिका भी हो सकती है। हालांकि, अभी तक किसी दूसरे हमलावर या साजिशकर्ता की पुष्टि नहीं हुई है। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के शुरुआती आकलन के मुताबिक सह-पायलट के अकेले कार्रवाई करने की संभावना है, लेकिन जांच जारी है।
सुरक्षा जांच में कहां हुई चूक?
फ्लाइट FZ1073 में सह-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। विमान अचानक करीब 14 हजार फीट नीचे चला गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू किया। बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल पायलट की सुरक्षा जांच को लेकर उठा है। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, तेल अवीव जाने वाली उड़ानों के पायलटों की पहचान और सुरक्षा जांच को और कड़ा करने का फैसला किया गया है। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि जिस सह-पायलट की राष्ट्रीयता को इजरायली अधिकारियों ने ओमानी बताया है, वह इजरायल जाने वाली उड़ान के चालक दल का हिस्सा कैसे बना। इजरायल और ओमान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
कॉकपिट में हथियार कैसे पहुंचा?
जांचकर्ताओं के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार विमान के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा। शुरुआती रिपोर्टों में आपातकालीन कुल्हाड़ी के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। यदि यह वही उपकरण था, तो जांच का फोकस इस बात पर भी होगा कि कॉकपिट में मौजूद आपातकालीन उपकरण को किसी हमले के लिए इस्तेमाल किए जाने से रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
क्या कोई और साजिश में शामिल था?
फिलहाल इसका कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायली अधिकारी अभी यह निश्चित रूप से नहीं कह रहे हैं कि सह-पायलट अकेला था या किसी व्यापक नेटवर्क का हिस्सा। दूसरी ओर, शुरुआती सुरक्षा आकलन में उसके अकेले कार्रवाई करने की संभावना जताई गई है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
यूएई ने भी मामले की व्यापक जांच शुरू की है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि घटना के पीछे आतंकवादी गतिविधि, पहले से बनाई गई योजना या किसी अन्य तरह की साजिश थी या नहीं। सऊदी अरब की शुरुआती जांच में भी पुष्टि हुई है कि विमान में कैप्टन पर सह-पायलट ने हमला किया था।
इस घटना ने विमानन सुरक्षा में ‘इनसाइडर थ्रेट’, यानी सुरक्षा घेरे के भीतर मौजूद व्यक्ति से पैदा होने वाले खतरे पर बहस तेज कर दी है। अब जांच का अहम हिस्सा यह तय करना होगा कि हमले की योजना कैसे बनी, सुरक्षा जांच में क्या छूटा और क्या भविष्य में पायलटों की स्क्रीनिंग तथा कॉकपिट सुरक्षा के नियमों में बदलाव की जरूरत है।


