चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़ पर पहुंच गई। अदालत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उठाए गए सवालों, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया और विपक्षी दलों की याचिकाओं पर सुनवाई निर्धारित है। इसी बीच, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट परिसर में विपक्षी मार्च के दौरान गर्भवती महिला पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की से जुड़ा मामला भी चर्चा में है। इस मामले में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में क्या कहा?
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि SIR से संबंधित फैसले आयोग ने सामूहिक रूप से और सर्वसम्मति से लिए थे। आयोग ने इस आरोप को खारिज किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा निर्णय लिए।
आयोग के अनुसार, 2025 और 2026 में जारी किए गए तीन प्रमुख SIR आदेश उचित प्रक्रिया के तहत पारित हुए। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले वैधानिक फॉर्म-6 में संशोधन नहीं किया गया। उसके मुताबिक, घोषणा-पत्र को अलग से व्यवस्थित करने का उद्देश्य आवेदकों का पुराने मतदाता रिकॉर्ड से मिलान आसान बनाना था।
यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। आयोग ने याचिका की स्वीकार्यता पर भी आपत्ति जताई है और कहा है कि आरोप एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित हैं।
इंडिया ब्लॉक समेत याचिकाकर्ताओं को देना होगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ी याचिकाएं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं। राहुल गांधी सहित विपक्ष के कई नेताओं ने आयोग के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
अब आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे के बाद याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष आयोग के जवाब पर क्या आपत्तियां उठाता है और अदालत इस मामले में आगे की कार्यवाही के लिए क्या निर्देश देती है।
यह विवाद केवल SIR की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इसमें आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था, चुनाव आयुक्तों की भूमिका और मतदाता सूची से जुड़े प्रशासनिक फैसलों की वैधता जैसे सवाल भी शामिल हैं।
गर्भवती पत्रकार से कथित धक्का-मुक्की का मामला
इसी घटनाक्रम से जुड़ा दूसरा मामला राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का है। आरोप है कि 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए पहुंचे विपक्षी नेताओं के मार्च के दौरान राहुल गांधी ने एक गर्भवती महिला पत्रकार का हाथ पकड़कर उन्हें खींचा, जिसके बाद भीड़ और सुरक्षा कर्मियों की हलचल में वह गिर गईं।
पत्रकार ऋचा पराशर ने दावा किया था कि वह उस समय लगभग तीन महीने की गर्भवती थीं। उनके मुताबिक, घटना में उन्हें चोटें आईं और उनका फोन भी टूट गया। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत के सामने इस मामले को उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले स्पष्ट किया था कि केवल मौखिक दलील के आधार पर स्वतः संज्ञान नहीं लिया जाएगा और इस विषय पर औपचारिक आवेदन दाखिल किया जाना चाहिए। बाद में अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।


