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UPSC में श्रुति ने हासिल की 329वीं रैंक, ChatGPT ने की मदद; गलत जवाबों से भी मिला सबक

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की श्रुति ओला ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया 329वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। साधारण परिवार से आने वाली श्रुति की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बीच देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को पास करने का सपना देखते हैं। उनकी तैयारी में किताबों और नियमित अध्ययन के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल ChatGPT की भी भूमिका रही। हालांकि, उनका अनुभव यह भी बताता है कि तकनीक पर आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है।

शक्तिनगर से BHU और इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक का सफर

श्रुति ओला की शुरुआती पढ़ाई सोनभद्र के शक्तिनगर स्थित सेंट जोसेफ स्कूल में हुई। उन्होंने यहीं से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं पास कीं। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से अंग्रेजी विषय में ऑनर्स के साथ स्नातक की पढ़ाई पूरी की। आगे उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून यानी एलएलबी की डिग्री हासिल की।

कानून की पढ़ाई ने उनके लिए यूपीएससी की तैयारी में मजबूत आधार तैयार किया। संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े विषयों की बुनियादी समझ पहले से होने के कारण उन्हें वैकल्पिक विषय के रूप में लॉ चुनने में मदद मिली। तैयारी के दौरान उन्होंने बेयर एक्ट और डी.डी. बसु की मानक किताबों पर भरोसा किया।

पहली कोशिश में नहीं मिली सफलता, दूसरी बार में कमाल

स्नातक और कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद श्रुति दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी करने लगीं। पहली कोशिश में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी। दूसरी कोशिश में उन्होंने परीक्षा पास करते हुए 329वीं रैंक हासिल की।

उनकी सफलता के पीछे नियमित पढ़ाई, विषयों की स्पष्ट समझ और परिवार का सहयोग अहम रहा। श्रुति अपने माता-पिता के विश्वास को अपनी बड़ी ताकत मानती हैं। उनके अनुसार, परीक्षा की तैयारी में केवल कोचिंग या महंगी अध्ययन सामग्री पर निर्भर रहने के बजाय बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करना जरूरी है।

ChatGPT से मिली मदद, लेकिन कई जवाब निकले गलत

श्रुति की तैयारी का एक खास पहलू ChatGPT का इस्तेमाल रहा। डिजिटल तकनीक के इस दौर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी AI टूल्स का सहारा ले रहे हैं। श्रुति ने भी इसका उपयोग किया, लेकिन उन्हें इसके जवाबों में गलतियां देखने को मिलीं।

उन्होंने बताया कि ChatGPT ने कई बार कानूनी मामलों से जुड़े गलत उत्तर दिए। यूपीएससी जैसी परीक्षा में, जहां तथ्यों, संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी अवधारणाओं की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसी गलतियां उम्मीदवार को भ्रमित कर सकती हैं।

इस अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि AI से किसी विषय को समझने, सवाल तैयार करने या कठिन अवधारणाओं पर चर्चा करने में मदद ली जा सकती है, लेकिन उसके हर जवाब को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए। खासकर कानून और संविधान से जुड़े सवालों की पुष्टि मानक पुस्तकों तथा आधिकारिक स्रोतों से करना जरूरी है।

अभ्यर्थियों को क्या सीख देती है श्रुति की कहानी?

श्रुति की सफलता का संदेश साफ है कि तकनीक तैयारी को आसान बनाने का माध्यम हो सकती है, लेकिन मेहनत और विषयों की समझ का विकल्प नहीं। उम्मीदवार ChatGPT का इस्तेमाल अभ्यास प्रश्न बनाने और अवधारणाओं को दोहराने के लिए कर सकते हैं, जबकि तथ्यों की जांच विश्वसनीय पुस्तकों से करनी चाहिए।

उनकी यात्रा यह भी बताती है कि पहली असफलता अंतिम नहीं होती। अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग से लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है। श्रुति ओला की 329वीं रैंक इसी निरंतर प्रयास की मिसाल है।

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