मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं ने एसआईआर की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।
राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने दाखिल की याचिका
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। याचिकाकर्ताओं ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप हैं, जिनकी पुष्टि न्यायिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। समिति को निर्धारित समयसीमा के भीतर एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और किए गए बदलावों का ऑडिट करना चाहिए।
विपक्ष ने यह भी मांग की है कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बूथवार जानकारी सार्वजनिक की जाए। इसके साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण बताया जाए और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
एसआईआर पर रोक लगाने की भी मांग
याचिकाकर्ताओं ने मामले में अंतिम फैसला आने तक कुछ राज्यों में जारी एसआईआर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम उचित नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना नहीं हटाया जाना चाहिए। याचिका में चुनाव आयोग से एसआईआर से संबंधित फैसलों के दस्तावेज, बैठक की कार्यवाही और संबंधित डिजिटल प्रणालियों के रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
अब चुनाव आयोग के जवाब पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी। चुनाव आयोग को नोटिस जारी होने के बाद मामले में उसके जवाब और अदालत के अगले निर्देशों पर नजर रहेगी। नोटिस जारी होना विपक्ष के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। अदालत में आगे की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि उठाए गए सवालों पर क्या निर्देश दिए जाते हैं।


