देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा की पुण्यतिथि पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेताओं ने उनके औद्योगिक योगदान, दूरदर्शी नेतृत्व और समाजसेवा को याद किया। रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर 2024 को हुआ था। उन्होंने अपने नेतृत्व में टाटा समूह को नई वैश्विक पहचान दिलाने के साथ ही कारोबार और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की मिसाल पेश की। आज टाटा समूह नमक, चाय और ऑटोमोबाइल से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।
योगी और रेखा गुप्ता ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रतन टाटा को श्रद्धांजलि देते हुए उनके जीवन को परिश्रम, विनम्रता और सेवा की प्रेरणादायक विरासत बताया। उन्होंने उद्योग, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक साथ लेकर चलने के उनके दृष्टिकोण को याद किया।
वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि रतन टाटा ने दूरदर्शी नेतृत्व और नवाचार के जरिए भारतीय उद्योग जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। रोजगार सृजन, राष्ट्र निर्माण और समाज कल्याण में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। अन्य नेताओं ने भी शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में उनके योगदान को याद किया।
वैश्विक कारोबार तक टाटा समूह का सफर
टाटा समूह की शुरुआत जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। समय के साथ यह समूह कपड़ा, इस्पात, बिजली, होटल, वाहन और उपभोक्ता उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में फैला। टाटा नमक और टाटा टी जैसे उत्पाद आम भारतीय परिवारों तक पहुंचे, जबकि टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टीसीएस ने औद्योगिक तथा तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
रतन टाटा ने 1991 में टाटा संस की कमान संभाली। उनके नेतृत्व में समूह ने वैश्विक विस्तार को गति दी। टेटली, कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसे अधिग्रहणों ने टाटा समूह की अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बढ़ाई। टाटा इंडिका और टाटा नैनो जैसी परियोजनाओं के जरिए भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों के अनुरूप वाहन विकसित करने पर भी जोर दिया गया। उनकी नेतृत्व शैली में दीर्घकालिक सोच, नवाचार और कारोबारी जोखिम उठाने की क्षमता महत्वपूर्ण रही।अब सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्र पर नजर
टाटा समूह की नई कारोबारी दिशा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में दिखाई देती है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की स्थापना 2020 में हुई थी। इसके बाद समूह ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, चिप असेंबली और परीक्षण तथा सेमीकंडक्टर निर्माण की क्षमताएं विकसित करने की दिशा में निवेश किया।
गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब और असम के जगीरोड में चिप असेंबली एवं परीक्षण सुविधा की योजनाएं भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। टाटा समूह ने वैश्विक तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारियां भी की हैं, ताकि देश में चिप निर्माण और संबंधित तकनीकों की क्षमता विकसित हो सके।
सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, कार, दूरसंचार उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े सिस्टम में होता है। इसलिए इस क्षेत्र में निवेश भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और उच्च कौशल वाले रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कारोबार के साथ समाजसेवा की भी विरासत
रतन टाटा की पहचान केवल उद्योगपति के रूप में नहीं रही। टाटा ट्रस्ट के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे क्षेत्रों में काम को बढ़ावा दिया गया। उनका मानना था कि किसी व्यवसाय की सफलता का महत्व समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी से भी जुड़ा होता है।
रतन टाटा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलियां उनके इसी योगदान को रेखांकित करती हैं। नमक और चाय जैसे रोजमर्रा के उत्पादों से लेकर सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत तकनीक तक टाटा समूह का विस्तार भारतीय उद्योग के बदलते स्वरूप की कहानी भी है। उनकी विरासत कारोबार, नवाचार और समाजसेवा के मेल के रूप में आगे बढ़ रही है।


