रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने की कोशिशों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच बेहद अच्छे और मैत्रीपूर्ण संबंध होने के बावजूद पीएम मोदी लगातार यूक्रेन संघर्ष खत्म करने का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी इस संकट के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए अपने विचार साझा करते हैं।
पुतिन की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। रूस के राष्ट्रपति ने इसी दौरान यूरोप और नाटो को लेकर कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि रूस की यूरोपीय देशों पर हमला करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन अगर रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला किया जाता है तो मॉस्को अपनी सुरक्षा के लिए उपलब्ध सभी हथियारों के इस्तेमाल के सवाल पर विचार करेगा।
कालिनिनग्राद को लेकर सबसे बड़ी चेतावनी
पुतिन के बयान में कालिनिनग्राद का मुद्दा खास तौर पर सामने आया। रूस का यह क्षेत्र बाल्टिक सागर के किनारे स्थित है और पोलैंड तथा लिथुआनिया के बीच रूस के मुख्य भूभाग से अलग है। यह क्षेत्र रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। रूस ने पहले ही नाटो को चेतावनी दी है कि अगर कालिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्से से अलग-थलग करने की कोशिश की गई तो वह अपनी पूरी सैन्य क्षमता के इस्तेमाल का विकल्प रखता है।
पुतिन ने कहा कि अगर रूस के खिलाफ सीधा हमला होता है और इसमें कालिनिनग्राद या उसके किसी अन्य क्षेत्र को निशाना बनाया जाता है, तो रूस के पास मौजूद सभी हथियारों के इस्तेमाल का मुद्दा तुरंत सामने आएगा। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसी स्थिति में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल निश्चित रूप से किया जाएगा, लेकिन रूस के पास मौजूद हथियारों की क्षमता को अपनी रणनीतिक बढ़त बताया।
नाटो की गतिविधियों पर भी सवाल
पुतिन ने बाल्टिक सागर में नाटो देशों के सैन्य अभ्यास और रूसी जहाजों को रोकने या जब्त करने जैसी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं तनाव बढ़ाने वाली हैं। उनका कहना था कि रूस को डराने की कोशिश की जा रही है और उसकी चेतावनी उसी का जवाब है। नाटो की ओर से रूस की परमाणु चेतावनियों पर चिंता जताई गई है और गठबंधन ने अपनी भूमिका को रक्षात्मक बताया है।
मोदी के प्रयासों का किया उल्लेख
पुतिन द्वारा पीएम मोदी का उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लगातार रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान और बातचीत की जरूरत पर जोर देता रहा है। अगस्त में मोदी ने भी पुतिन से कहा था कि युद्ध को मानवता के हित में समाप्त किया जाना चाहिए और भारत शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
इस तरह पुतिन के ताजा बयान में एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री के शांति प्रयासों की सराहना दिखाई दी, तो दूसरी तरफ रूस ने पश्चिम को यह संदेश दिया कि कालिनिनग्राद या रूसी क्षेत्र पर सीधा हमला होने की स्थिति में मॉस्को अपनी सैन्य प्रतिक्रिया को सीमित नहीं मानता।


