आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने आने वाले चुनावों में समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं, जिससे एक बार फिर बीजेपी और अकाली दल के पुराने गठबंधन के पुनरुजीवित होने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं।
गठबंधन की अटकलों को मिला बल
वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दों को लेकर एनडीए (NDA) से अलग होने वाले शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच पिछले कुछ समय से दूरियां घटने के संकेत मिले हैं। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और शीर्ष नेताओं की मुलाकातों के बाद से पंजाब के राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दल आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हाथ मिला सकते हैं। हालांकि, दोनों तरफ से अभी औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन संकेतों ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
पुराने सहयोगियों की वापसी की जरूरत
जनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ चुनावों (जैसे 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव) में दोनों ही दलों का प्रदर्शन उनके सियासी कद के मुताबिक नहीं रहा है। ऐसे में पंजाब में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने और सत्ता में वापसी के लिए दोनों दलों के बीच दोबारा गठबंधन की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि अकाली दल और बीजेपी एक साथ आते हैं, तो पंजाब का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय रूप ले सकता है, जिससे सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के लिए कड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।


