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राजनीतिक संघर्ष : राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का मार्च, नितिन नवीन ने निकाली ‘लोकतंत्र बचाओ’ यात्रा

देश की राजनीति में एक नवंबर को चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी टकराव सड़कों पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के सांसद ‘चलो दिल्ली’ मार्च निकालते हुए रामलीला मैदान की ओर रवाना हुए। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों और कथित वोट चोरी के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। दूसरी ओर, हरियाणा के रोहतक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ मार्च’ शुरू किया। दोनों घटनाओं ने देश में भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक संघर्ष को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राहुल गांधी के नेतृत्व में दिल्ली मार्च

दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ विपक्षी गठबंधन के कई सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सांसदों का लक्ष्य रामलीला मैदान पहुंचकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया के खिलाफ अपनी आवाज उठाना है।

विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान कई राज्यों में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने और सूची में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से इन आरोपों पर जवाब मांग रही है।

राहुल गांधी पहले भी लोकसभा चुनाव 2024 में कथित वोट चोरी का मुद्दा उठा चुके हैं। उनका दावा है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठा रहा है।

भाजपा ने रोहतक में क्यों निकाली पैदल यात्रा?

दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन के समानांतर भाजपा ने हरियाणा के रोहतक में अपनी राजनीतिक मुहिम शुरू की। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा का नेतृत्व किया। यह यात्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र में आयोजित की गई।

पदयात्रा की शुरुआत छोटूराम पॉलिटेक्निक मैदान से हुई और इसका समापन मॉडल टाउन स्थित डी-पार्क पर होना तय किया गया। नितिन नवीन विशेष रूप से सजाई गई खुली जीप में सवार होकर लोगों का अभिवादन करते हुए आगे बढ़े। यात्रा में हरियाणा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए।

भाजपा ने इस अभियान को विपक्ष के कथित दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की राजनीति के खिलाफ जनसंपर्क अभियान बताया। पार्टी का कहना है कि विपक्ष चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर गलत जानकारी फैला रहा है।

भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

भाजपा का यह मार्च ऐसे समय में हुआ, जब कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों का मुद्दा भी उठाया है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने उस हिंसा की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा का एक अन्य मार्च दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में हरि नगर से तिलक नगर मेट्रो स्टेशन तक भी प्रस्तावित था। इसके जरिए पार्टी 1984 के दंगों में मारे गए लोगों को याद करते हुए कांग्रेस को घेरना चाहती थी।

SIR और चुनाव आयोग बना सियासी टकराव का केंद्र

दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।

वहीं भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करना चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया है और विपक्ष राजनीतिक कारणों से इसे विवाद का विषय बना रहा है।

एक ही दिन दो मार्च, दो अलग राजनीतिक संदेश

एक तरफ दिल्ली में इंडिया गठबंधन चुनाव आयोग की जवाबदेही और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है, तो दूसरी तरफ रोहतक में भाजपा विपक्ष के आरोपों को चुनौती दे रही है।

इस राजनीतिक घटनाक्रम में दोनों पक्ष लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता को अपना प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। आने वाले दिनों में एसआईआर, वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर संसद से लेकर सड़कों तक राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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