Wednesday, May 29, 2024
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चुनाव के मुहाने पर हरियाणा में खेला.. अल्पमत के बाद भी सरकार को नहीं है खतरा

हरियाणा में भाजपा ने पिछले महीने सीएम फेस बदला है, लेकिन अब लोकसभा चुनाव के मुहाने पर सरकार के लिए खतरे की घंटी बज गई है। दरअसल हरियाणा के 3 निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन वापस ले लिया है। इससे नायब सिंह सैनी की सरकार अल्पमत में आ गई है। हालांकि अल्पमत में होने के बाद भी सरकार चलती रहेगी। इसका कारण यह है कि कांग्रेस अभी हाल ही में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी। ऐसे में नियमानुसार 6 माह तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। इसके बाद नवंबर में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार भंग कर भाजपा समय से पहले चुनाव करा सकती है।

ऐसा है बहुमत का गणित

वर्तमान में सरकार को 48 विधायकों का समर्थन प्राप्त था, जिसमें 41 भाजपा हरियाणा लोकहित पार्टी के गोपाल कांडा और 6 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। मनोहर लाल और रणजीत चौटाला पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। अब 3 विधायकों ने समर्थन वापस ले लिया है। ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 44 हो गया है, जबकि भाजपा के पास 43 विधायक हैं। ऐसे में एक विधायक का जुगाड़ हो सकता है।

तीनों विधायकों ने दिया यह तर्क

हरियाणा के पुंडरी के निर्दलीय विधायक रणधीर सिंह गोलेन ने कहा कि मैं अपने क्षेत्र के लोगों से चर्चा कर रहा था कि क्या किया जाना चाहिए। सभी के सुझाव लेने के बाद मैंने यह फैसला लिया है। आज किसान दुखी है, मजदूर दुखी है, कर्मचारी दुखी है। अब हम कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं। वहीं चरखी दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान, नीलोखेड़ी से निर्दलीय विधायक धर्मपाल गोंदर भी कांग्रेस को समर्थन दे चुके हैं।

नैतिकता बची है तो इस्तीफा दें सैनी

तीन निर्दलीय विधायकों द्वारा राज्य सरकार से समर्थन वापस लेने पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि निर्दलीय विधायकों ने भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस लिया है और कांग्रेस को समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने जनभावनाओं के तहत यह फैसला लिया है। सरकार का नैतिक अधिकार खत्म हो गया है। सीएम को पद छोडक़र इस्तीफा दे देना चाहिए और यहां राष्ट्रपति शासन लागू करना चाहिए ताकि निष्पक्ष चुनाव हो सकें।

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