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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चीन के दावे का पाकिस्तान का समर्थन, भारत ने किया पलटवार

भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद हुए संघर्ष विराम को लेकर चीन के मध्यस्थता के दावे ने एक नया राजनयिक विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान द्वारा चीन के इस दावे का समर्थन किए जाने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

चीन का विवादित दावा

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में आयोजित एक वार्षिक संगोष्ठी के दौरान कहा कि चीन ने 2025 में दुनिया के कई ‘हॉटस्पॉट’ मुद्दों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने इस सूची में भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव को भी शामिल किया और दावा किया कि चीन की ‘मध्यस्थता’ के कारण दोनों देशों के बीच संघर्ष थमा।

भारत का पलटवार: “किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं”

भारतीय विदेश मंत्रालय और सरकारी सूत्रों ने चीन के इन दावों को “विचित्र” और “निराधार” बताया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि:

  • सीधे सैन्य संवाद: मई 2025 में हुआ संघर्ष विराम दोनों देशों के DGMO (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच हुई सीधी बातचीत का परिणाम था।
  • द्विपक्षीय मुद्दा: भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इनमें किसी भी तीसरे पक्ष (चीन या अमेरिका) के दखल की कोई जगह नहीं है।
  • दोहरा मापदंड: विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ चीन पाकिस्तान को 81% हथियारों की आपूर्ति करता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान खुफिया जानकारी (Real-time intelligence) साझा कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ वह ‘मध्यस्थ’ होने का ढोंग कर रहा है।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

यह विवाद मई 2025 में हुई सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है:

  1. पृष्ठभूमि: अप्रैल 2025 में पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी।
  2. जवाबी कार्रवाई: इसके जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान के अंदर 9 प्रमुख आतंकी शिविरों को नष्ट कर दिया गया।
  3. परिणाम: पाँच दिनों तक चले भारी संघर्ष के बाद, 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ था।

पाकिस्तान का रुख

पाकिस्तान ने चीन के दावे का तुरंत समर्थन करते हुए बीजिंग की भूमिका को “शांतिपूर्ण” बताया है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान ऐसा करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को एक ‘अड़ियल’ पक्ष के रूप में दिखाना चाहता है, जबकि भारत ने इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान पर प्रहार बताया है।

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