देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर भाजपा को अहंकार से बचने की नसीहत दी और लोकसभा चुनाव भी बैलेट पेपर से कराने की चुनौती दी। वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने SIR के तहत करीब 10 करोड़ मतदाताओं की जांच में लगभग 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान होने के आंकड़े पर सवाल उठाए। पार्टी ने पूछा कि जब विदेशी नागरिकों की संख्या इतनी कम बताई जा रही है, तो लाखों मतदाताओं के नाम सूची से क्यों हटाए गए?
खरगे की चुनौती: संसद भंग कर बैलेट पेपर से चुनाव कराएं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा के चुनावी प्रदर्शन को लेकर किए जा रहे दावों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी जीत पर अहंकार नहीं करना चाहिए। कांग्रेस लंबे समय से लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग कर रही है।
खरगे और विपक्षी गठबंधन का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी दोहराई है।
एमएलसी चुनाव में भाजपा को कहां झटका लगा?
चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगियों ने कुल 16 सीटें जीतीं। भाजपा को 13 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस केवल एक सीट जीत सकी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने भी पांच सीटें हासिल कीं।
महाराष्ट्र के नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया। नागपुर आरएसएस का मुख्यालय होने के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। कांग्रेस ने इस जीत को भाजपा के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर पेश किया।
SIR पर कांग्रेस ने क्यों उठाए सवाल?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 29 अक्टूबर को दावा किया कि कर्नाटक, झारखंड, मेघालय, केरल, गोवा और मिजोरम में करीब 10 करोड़ मतदाताओं की जांच के दौरान लगभग 1,600 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई। उन्होंने सवाल किया कि जब SIR का एक घोषित उद्देश्य विदेशी नागरिकों के नाम हटाना था, तो इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची की जांच और लाखों नामों को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
रमेश के मुताबिक, कर्नाटक में मतदाता सूची से करीब 99.7 लाख नाम हटाए गए, जबकि 716 विदेशी नागरिकों की पहचान हुई। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए।
हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के कारण केवल विदेशी नागरिक होना नहीं हैं। मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य पात्रता संबंधी कारण भी पुनरीक्षण का हिस्सा हो सकते हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों पर भी चर्चा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने कहा कि राज्यों से विदेशी नागरिकों का अलग-अलग आंकड़ा जुटाने के लिए नहीं कहा गया था। कुछ राज्यों ने भी बताया कि उनके पास ऐसा अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए 1,600 का आंकड़ा सभी राज्यों में मिले विदेशी नागरिकों की अंतिम और संपूर्ण संख्या नहीं माना जा सकता। <Cite refs={[“turn435441search6”]}/>
कुल मिलाकर, एमएलसी चुनाव के नतीजों और SIR के आंकड़ों ने भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर भाजपा विपक्ष के चुनावी प्रदर्शन पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार पर जवाब मांग रही है।


