कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 25 अक्टूबर को पटना में बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के कार्यक्रम के दौरान खरगे ने एक व्यक्ति की टिप्पणी के जवाब में कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए माफी की मांग की। दरअसल, खरगे चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहे थे। इसी दौरान दर्शकों में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे। इस पर खरगे ने यह जवाब दिया।
भाजपा नेताओं ने टिप्पणी को प्रधानमंत्री के परिवार का अपमान बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने खरगे के बयान पर आपत्ति जताई। वहीं, कांग्रेस ने सफाई देते हुए दावा किया कि टिप्पणी से पहले एक व्यक्ति ने खरगे के दिवंगत पिता को लेकर अपमानजनक बात कही थी। पार्टी के मुताबिक, खरगे का संदर्भ प्रधानमंत्री के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से था। इस विवाद ने कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।
‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया था
चेन्नई में खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया था। बयान सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा। विवाद बढ़ने पर खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय प्रधानमंत्री को शाब्दिक अर्थ में आतंकवादी कहना नहीं था, बल्कि वह विपक्ष को डराने के लिए सरकारी एजेंसियों के कथित इस्तेमाल की बात कर रहे थे।
खरगे ने क्या दी सफाई?
विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री को आतंकवादी बताना नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए विपक्ष को डराया जाता है। खरगे ने इसे ‘टैक्स टेररिज्म’ के संदर्भ में समझाते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री की कार्यशैली और विपक्ष के खिलाफ कथित दबाव की राजनीति पर सवाल उठा रहे थे। भाजपा नेताओं ने इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
2023 में पीएम मोदी को बताया था ‘जहरीला सांप’
खरगे के बयानों को लेकर विवाद पहली बार नहीं हुआ है। अप्रैल 2023 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तुलना ‘जहरीले सांप’ से की थी। इस बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई थी। बाद में खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा के संदर्भ में थी। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
2022 में ‘रावण’ से की थी तुलना
नवंबर 2022 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के हर चुनाव में भाजपा का प्रमुख चेहरा होने पर सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि क्या मोदी के रावण की तरह सौ सिर हैं, जो हर चुनाव में उन्हीं के नाम पर वोट मांगे जाते हैं। इस टिप्पणी पर भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री और गुजरात के लोगों का अपमान बताया था। खरगे ने तब भी कहा था कि वह महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी जैसे मुद्दों पर सरकार की आलोचना कर रहे थे।
‘झूठों का सरदार’ कहने पर भी हुआ था विवाद
नवंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘झूठों का सरदार’ कहा था। उन्होंने चुनावी वादों और 15 लाख रुपये देने के पुराने वादे का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा था। भाजपा ने इस टिप्पणी का विरोध किया था।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि खरगे और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौरान भाषा को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। एक ओर कांग्रेस अध्यक्ष अपनी टिप्पणियों को सरकार की नीतियों और कथित दबाव की राजनीति की आलोचना बताते रहे हैं, वहीं भाजपा उन्हें प्रधानमंत्री के प्रति व्यक्तिगत अपमानजनक टिप्पणी करार देती रही है।


