भारत-चीन सीमा पर तनाव एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी पीएलए (PLA) के साथ भारतीय जवानों का आमना-सामना (फेस-ऑफ) लगातार जारी है। इस खुलासे के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर तीखा प्रहार किया है।
ITBP प्रमुख का बड़ा बयान और आधुनिकीकरण पर जोर राजस्थान के अलवर स्थित सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ के दौरान डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों से अरुणाचल के कई इलाकों में चीनी सेना के साथ गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने इस दौरान आईटीबीपी की नई एलीट यूनिट ‘शौर्य कमांडो’ के शौर्य और पराक्रम की सराहना की।
डीजी ने यह भी स्वीकार किया कि आधुनिक युद्ध तकनीक के दौर में पारंपरिक हथियार चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आईटीबीपी का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण किया जा रहा है। कुल 4000 करोड़ रुपये की आधुनिकीकरण योजना के तहत लगभग 1000 करोड़ रुपये केवल ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च किए जा रहे हैं। साथ ही, फॉरवर्ड पोस्ट पर सुरक्षा पुख्ता करने के लिए अंडरग्राउंड शेल्टर का निर्माण किया जा रहा है।
जुलाई से चल रहा है सीमा विवाद मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मौजूदा गतिरोध जुलाई 2026 से शुरू हुआ था, जब अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग और माजा इलाके में रूटीन गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद सितंबर में दोनों पक्षों के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत भी हुई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
कांग्रेस का केंद्र सरकार पर तीखा हमला (‘Deafening Silence’) ITBP प्रमुख के इस बयान के सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार को घेर लिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए सरकार की ‘कानफोड़ू चुप्पी’ (Deafening Silence) पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने सरकार पर निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए:
- सीमा पर स्थिति पर पर्दा डालना: टक्सिंग फेस-ऑफ और उसके बाद हुई उच्च-स्तरीय सैन्य वार्ताओं के बारे में देश को अंधेरे में रखा गया।
- पेट्रोलिंग पॉइंट्स खोने का अंदेशा: स्थानीय लोगों के हवाले से यह दावा किया गया कि लद्दाख की तरह अरुणाचल प्रदेश में भी भारतीय गश्ती दल के कई पॉइंट्स पर पकड़ कमजोर हुई है।
- ड्रैगन की आक्रामकता: चीन द्वारा लगातार अरुणाचल के क्षेत्रों के नाम बदलने और सीमा के पास बड़े पैमाने पर बांध बनाने से भारत की जल और पर्यावरण सुरक्षा खतरे में है।
- व्यापार घाटा: भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जिससे सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले पर सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस खुलासे के बाद देश की सुरक्षा नीति को लेकर सियासी पारा फिर से चढ़ गया है।


