संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को उसके आंतरिक हालात, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सेना के राजनीतिक प्रभाव को लेकर घेरा है। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत की छवि खराब करने के लिए कर रहा है, जबकि उसे अपने देश की आर्थिक चुनौतियों, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। भारत के प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तानी सेना को देश का वास्तविक ताकतवर पक्ष बताते हुए कहा कि वहां की सरकार में सेना के निर्देशों को चुनौती देने का साहस नहीं है।
‘पाकिस्तान में सेना के हित सर्वोपरि’
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चर्चा के दौरान भारत की ओर से यह बयान दिया गया। भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपने घरेलू संकटों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान हटाने के लिए भारत के खिलाफ प्रचार कर रहा है।
पुरी ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति, कानून-व्यवस्था और खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपने नागरिकों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान में सेना के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने वहां की सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ बताते हुए आरोप लगाया कि वह सेना के निर्देशों के खिलाफ निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। यह भारत की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है।
क्या है ‘फॉर्म 47 सरकार’ का मामला?
पाकिस्तान में फॉर्म 47 एक आधिकारिक चुनावी दस्तावेज है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के मतदान के समेकित परिणाम दर्ज होते हैं। फरवरी 2024 में हुए आम चुनावों के बाद चुनावी नतीजों में कथित हेरफेर और अनियमितताओं को लेकर विवाद हुआ था।
पाकिस्तान में सरकार के आलोचक इन्हीं आरोपों के संदर्भ में ‘फॉर्म 47 सरकार’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं। भारतीय प्रतिनिधि ने भी इसी शब्द के जरिए पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और सेना के प्रभाव पर सवाल उठाए। हालांकि, यह शब्द राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है और अपने आप में चुनावी धांधली का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भी उठाए सवाल
भारत ने पाकिस्तान के उस रुख पर भी सवाल उठाया, जिसमें वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा उठाता है। रघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान को अपने यहां धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आजादी के बाद से पाकिस्तान में अल्पसंख्यक आबादी का अनुपात काफी घटा है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना हर देश की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत को बहुधार्मिक, बहुभाषी और बहुजातीय समाज बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों ने भारत के संवैधानिक संस्थानों, सेना, सरकारी सेवाओं, फिल्म उद्योग और कारोबार सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जम्मू-कश्मीर पर भारत ने दोहराया अपना रुख
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दावों को भी खारिज किया। रघू पुरी ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करना चाहिए। यह जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत का आधिकारिक रुख है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर फिर आमने-सामने भारत-पाकिस्तान
संयुक्त राष्ट्र में यह बयानबाजी दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक तनाव को दर्शाती है। भारत ने पाकिस्तान से अपने नागरिकों के कल्याण, मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान देने की अपील की।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत का मुख्य संदेश था कि पाकिस्तान को भारत पर आरोप लगाने के बजाय अपनी घरेलू चुनौतियों का समाधान करना चाहिए। वहीं, सेना के राजनीतिक प्रभाव और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भारत की आलोचना का हिस्सा रहे।


