More
    HomeHindi NewsBusinessभारत-चीन चाह लें खत्म हो जाएगा युद्ध, जेलेंस्की का बड़ा दावा, रूस...

    भारत-चीन चाह लें खत्म हो जाएगा युद्ध, जेलेंस्की का बड़ा दावा, रूस हो जाएगा कंगाल?

    रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भारत और चीन को लेकर बड़ा बयान दिया है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अगर भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदना बंद कर दें तो मॉस्को के पास युद्ध जारी रखने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि रूस की अर्थव्यवस्था को भारत, चीन और कुछ हद तक तुर्की से होने वाली ऊर्जा बिक्री से सहारा मिल रहा है।

    भारत-चीन पर जेलेंस्की की नजर

    जेलेंस्की ने कहा कि रूस को युद्ध जारी रखने के लिए जिस आर्थिक ताकत की जरूरत है, उसमें उसके ऊर्जा निर्यात की बड़ी भूमिका है। उनके मुताबिक चीन, भारत और तुर्की रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं और इससे मॉस्को को राजस्व मिल रहा है। उनका दावा है कि अगर इन देशों की ओर से रूसी ऊर्जा की खरीद रुक जाए तो रूस पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ सकता है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने इसी आधार पर कहा कि अमेरिका के साथ मिलकर भारत और चीन रूस पर दबाव डालें तो युद्ध को रोकने की दिशा में असर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए नए प्रतिबंधों और टैरिफ उपायों की बात कर रहा है।

    UNGA में युद्ध खत्म करने पर जोर

    जेलेंस्की संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। उन्होंने इस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई नेताओं से मुलाकात की। ट्रंप और जेलेंस्की के बीच करीब 40 मिनट हुई बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के रास्तों पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने बैठक को सकारात्मक और उपयोगी बताया।

    जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि युद्ध सर्दियों से पहले खत्म हो। उन्होंने रूस के साथ ‘एनर्जी सीजफायर’ का प्रस्ताव भी दोहराया है। इसके तहत अगर रूस यूक्रेन के बिजली, हीटिंग और जल आपूर्ति जैसे ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकता है, तो यूक्रेन भी रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए तैयार है।

    रूस की अर्थव्यवस्था को बताया युद्ध की अहम कड़ी

    जेलेंस्की के बयान का मुख्य फोकस रूस की अर्थव्यवस्था और उसके ऊर्जा निर्यात पर रहा। उन्होंने तर्क दिया कि रूस के लिए ऊर्जा से मिलने वाला राजस्व युद्ध के खर्च को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। इसलिए रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर दबाव बढ़ाने को उन्होंने युद्ध समाप्त करने की संभावित रणनीति के तौर पर पेश किया है। यह जेलेंस्की का आकलन है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि भारत या चीन ने रूसी ऊर्जा खरीद रोकने का कोई निर्णय लिया है।

    इस बीच, जेलेंस्की ने रूस के साथ बातचीत की संभावना भी खुली रखी है। उन्होंने ट्रंप के साथ त्रिपक्षीय बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की इच्छा जताई है। वहीं, मौजूदा समय में दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं और युद्ध खत्म करने की कूटनीतिक कोशिशें अभी निर्णायक समझौते तक नहीं पहुंची हैं।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments