मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दीपके ने दावा किया कि हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में भाजपा की जीत ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद बढ़े वोट शेयर की वजह से हुई। हालांकि, चुनावों की तारीख और ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल की टाइमलाइन इस दावे पर सवाल खड़े करती है।
क्या है अभिजीत दीपके का दावा?
वायरल वीडियो में दीपके ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के सीईसी बनने के बाद भाजपा का वोट शेयर हरियाणा में करीब 36 से बढ़कर 40 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 25 से 27 प्रतिशत और दिल्ली में 38 से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गया। उन्होंने इन आंकड़ों को भाजपा की चुनावी जीत से जोड़ते हुए ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए।
यह दावा ऐसे समय आया है जब सीजेपी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी की है।
सबसे अहम तथ्य: चुनाव कब हुए?
दावे की पड़ताल में सबसे महत्वपूर्ण बात चुनावों की तारीख है। निर्वाचन आयोग के मुताबिक ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला। इससे पहले वह 15 मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त थे।
वहीं हरियाणा विधानसभा चुनाव का मतदान 5 अक्टूबर 2024 को हुआ और नतीजे 8 अक्टूबर 2024 को आए। महाराष्ट्र में मतदान 20 नवंबर 2024 को हुआ और परिणाम 23 नवंबर 2024 को घोषित हुए। दिल्ली विधानसभा चुनाव का मतदान 5 फरवरी 2025 को और मतगणना 8 फरवरी 2025 को हुई। यानी इन तीनों चुनावों के नतीजे ज्ञानेश कुमार के सीईसी बनने से पहले घोषित हो चुके थे।
फिर वोट शेयर को कैसे देखा जाए?
भाजपा के वोट शेयर में अलग-अलग चुनावों के बीच बदलाव होना अपने आप में असामान्य नहीं है। किसी पार्टी के प्रदर्शन पर उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन, मतदान प्रतिशत और क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों समेत कई कारकों का प्रभाव पड़ सकता है।
इसलिए केवल यह तथ्य कि किसी चुनाव में भाजपा का वोट शेयर पहले के चुनाव की तुलना में बढ़ा, उससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि वृद्धि का कारण मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभालना था। खास तौर पर हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों के मामले में यह दावा टाइमलाइन से मेल नहीं खाता, क्योंकि दोनों चुनाव ज्ञानेश कुमार के सीईसी बनने से पहले ही हो चुके थे।
ज्ञानेश कुमार की भूमिका क्या थी?
यह भी महत्वपूर्ण है कि ज्ञानेश कुमार मार्च 2024 से चुनाव आयुक्त के रूप में आयोग का हिस्सा थे। निर्वाचन आयोग के अनुसार, उनके चुनाव आयुक्त रहने के दौरान लोकसभा के साथ हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और दिल्ली समेत कई चुनाव हुए। बाद में 19 फरवरी 2025 को उन्होंने सीईसी का पद संभाला।
मौजूदा तथ्य यह दिखाते हैं कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा की जीत को ज्ञानेश कुमार के सीईसी बनने से जोड़ना तारीखों के लिहाज से संभव नहीं है। दिल्ली का चुनाव भी उनके सीईसी बनने से 11 दिन पहले पूरा हो चुका था। इसलिए दीपके के दावे और चुनावी टाइमलाइन के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
सीजेपी के आरोप चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। इन आरोपों की अलग से जांच और तथ्यात्मक प्रमाण की जरूरत होगी; केवल चुनाव परिणाम और सीईसी के कार्यकाल के बीच समय-संबंध किसी आरोप को साबित नहीं करता।


