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    इतिहास रचेगा Google: अंतरिक्ष भेजी जाएंगी TPU चिप्स, AI डेटा सेंटरों की रखी जाएगी नींव

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती जरूरतों के बीच गूगल अब कंप्यूटिंग की दुनिया को धरती से अंतरिक्ष तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के Project Suncatcher के तहत 1 अक्टूबर 2026 को पहली बार गूगल की Tensor Processing Unit यानी TPU चिप्स को अंतरिक्ष में भेजने का परीक्षण किया जाएगा। यह मिशन सफल रहा तो भविष्य में अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा से चलने वाले एआई डेटा सेंटर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, फिलहाल इसे पूरी तरह तैयार डेटा सेंटर नहीं, बल्कि तकनीक के परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।

    चार TPU चिप्स जाएंगी अंतरिक्ष में

    गूगल का शुरुआती परीक्षण काफी छोटा होगा। इसके लिए एक प्रोटोटाइप सैटेलाइट तैयार किया गया है, जिसे MVP नाम दिया गया है। इसमें गूगल की चार TPU चिप्स लगाई गई हैं। यह सैटेलाइट स्पेसएक्स के Falcon 9 रॉकेट से Transporter-18 rideshare mission के तहत लॉन्च किया जाएगा। इसे गूगल ने सैटेलाइट कंपनी Planet के साथ मिलकर तैयार किया है।

    इस मिशन का मुख्य सवाल है कि क्या गूगल की एआई चिप्स अंतरिक्ष के बेहद अलग वातावरण में काम कर सकती हैं। लॉन्च के दौरान तेज कंपन और अत्यधिक त्वरण, कक्षा में पहुंचने के बाद रेडिएशन और तापमान में भारी बदलाव जैसी परिस्थितियां चिप्स के लिए चुनौती बन सकती हैं।

    अंतरिक्ष में क्यों लगाना चाहता है डेटा सेंटर?

    Project Suncatcher का विचार भविष्य में ऐसे सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने का है, जिनमें बड़ी संख्या में TPU चिप्स लगी हों और वे सौर ऊर्जा से संचालित होकर अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग कर सकें। गूगल के मुताबिक, पृथ्वी की निचली कक्षा में सैटेलाइटों को लगभग लगातार सूर्य का प्रकाश मिल सकता है। कंपनी का अनुमान है कि वहां सौर ऊर्जा उत्पादन पृथ्वी की तुलना में कई गुना अधिक हो सकता है।

    एआई मॉडल की ट्रेनिंग और संचालन के लिए लगातार बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत पड़ रही है। इससे धरती पर डेटा सेंटरों के लिए बिजली, जमीन और कूलिंग जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। गूगल का शोध इस संभावना को तलाश रहा है कि भविष्य में इन संसाधन संबंधी दबावों को कुछ हद तक अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग से कम किया जा सके। कंपनी के शोधपत्र में भी सौर ऊर्जा, हाई-बैंडविड्थ संचार, रेडिएशन सहनशीलता और थर्मल मैनेजमेंट को इस व्यवस्था के प्रमुख हिस्सों के रूप में चिन्हित किया गया है।

    सबसे बड़ी चुनौती होगी चिप्स को ठंडा रखना

    अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाने की राह आसान नहीं है। पृथ्वी पर सर्वर को ठंडा करने के लिए हवा और पानी आधारित कूलिंग सिस्टम इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन अंतरिक्ष में वैक्यूम होने के कारण हवा के जरिए गर्मी बाहर निकालना संभव नहीं है।

    गूगल इस समस्या के लिए heat pipes और radiators जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। शुरुआती परीक्षण में इनसे चिप्स की गर्मी को अंतरिक्ष की ओर विकिरित करने की कोशिश की जाएगी।

    रेडिएशन की भी होगी परीक्षा

    अंतरिक्ष में मौजूद कॉस्मिक किरणें और सौर विकिरण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। गूगल ने जमीन पर किए परीक्षणों में अपनी Trillium TPU चिप्स को रेडिएशन के संपर्क में रखकर जांचा है। कंपनी के मुताबिक, शुरुआती परिणामों में चिप्स ने पांच साल के अंतरिक्ष मिशन में मिलने वाले अनुमानित रेडिएशन से अधिक स्तर को सहन किया। अब वास्तविक अंतरिक्ष वातावरण में इनकी क्षमता की जांच होगी।

    आगे क्या होगा?

    1 अक्टूबर का मिशन सिर्फ शुरुआत है। गूगल भविष्य में कई सैटेलाइटों को एक साथ जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। इन सैटेलाइटों के बीच तेज डेटा ट्रांसफर के लिए लेजर आधारित ऑप्टिकल लिंक इस्तेमाल करने की योजना है। 2027 में दो सैटेलाइटों के जरिए इस संचार तकनीक का परीक्षण करने की तैयारी है।

    इसलिए 1 अक्टूबर का मिशन अंतरिक्ष में तैयार डेटा सेंटर शुरू करने की घोषणा नहीं है। यह यह पता लगाने की कोशिश है कि एआई कंप्यूटिंग हार्डवेयर अंतरिक्ष में कितना टिकाऊ और व्यावहारिक साबित हो सकता है। गूगल के लिए इसके नतीजे भविष्य के Suncatcher डिजाइन और अंतरिक्ष आधारित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।

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