हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका अभिनय, बेबाक अंदाज और समाजसेवा की विरासत लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक है। नाना पाटेकर की जिंदगी का एक ऐसा पहलू भी सामने आया है, जो उनके व्यक्तित्व को अभिनय से कहीं आगे ले जाता है। वह अपने अंतिम समय तक जरूरतमंदों की मदद और किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए सक्रिय थे। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों के लिए आर्थिक सहायता जुटाने के उद्देश्य से वह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के कार्यक्रम में शामिल होने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उनका निधन हो गया। नाना पाटेकर ने किसानों की समस्याओं को करीब से देखा था। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा सहित सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों की मुश्किलें कम करने के लिए उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी सिलसिले में वह अधिक से अधिक आर्थिक मदद जुटाने के लिए KBC में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
नाना को बृहस्पतिवार को गोवा से मुंबई आना था और शुक्रवार को कार्यक्रम में हिस्सा लेना था। उनका उद्देश्य सूखा प्रभावित किसानों के लिए फंड जुटाना था। हालांकि, उनके अचानक निधन से यह योजना अधूरी रह गई। किसानों के लिए उनका यह प्रयास बताता है कि सामाजिक सरोकार उनके जीवन का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा थे।
अपनी अंतिम विदाई की तैयारी भी पहले ही कर रखी थी
नाना पाटेकर अपनी बेबाक बातों और जिंदगी को अलग नजरिए से देखने के लिए पहचाने जाते थे। वर्ष 2023 में फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर’ के प्रचार के दौरान दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर भी खुलकर बात की थी।
उन्होंने बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए करीब 12 मन सूखी लकड़ियां अलग रखी थीं। उनका कहना था कि अंतिम विदाई के समय गीली लकड़ियों का इस्तेमाल न किया जाए, क्योंकि उनसे धुआं निकलेगा और लोगों की आंखों में पानी आ जाएगा। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि कहीं उन्हें यह गलतफहमी न हो जाए कि लोग उनके लिए रो रहे हैं।
नाना की यह बात उनके सहज, स्पष्टवादी और विनोदी स्वभाव को दर्शाती है। वह मृत्यु को जीवन की स्वाभाविक सच्चाई मानते थे और जरूरत से ज्यादा संपत्ति जुटाने को जीवन का उद्देश्य नहीं समझते थे।
बेटे मल्हार को सौंप गए समाजसेवा की जिम्मेदारी
नाना पाटेकर की विरासत अब उनके बेटे मल्हार पाटेकर और उनके सहयोगियों के सामने एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में है। मल्हार ने पिता के सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। उनके मुताबिक, नाना का मानना था कि मानवता की बेहतरी के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।
नाना और उनके सहयोगियों ने NAAM फाउंडेशन के माध्यम से जल संरक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम किया। इन पहलों का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बेहतर बनाना था। मल्हार ने बताया कि उनके पिता ने कई लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी थीं, ताकि उनके जाने के बाद भी काम चलता रहे।
कश्मीर से महाराष्ट्र तक फैले थे सेवा के सपने
मल्हार के अनुसार, नाना की सामाजिक पहल केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं थी। जम्मू-कश्मीर और उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों में भी शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने की योजनाएं थीं। उनका सपना था कि समाजसेवा का दायरा और व्यापक हो तथा अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचे।
नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे जिले के डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके बेटे मल्हार ने मुखाग्नि दी। अब परिवार और फाउंडेशन से जुड़े लोगों के सामने उनके अधूरे सामाजिक कार्यों को पूरा करने की चुनौती है।


