हिंद महासागर में भारत की सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में भारतीय नौसेना ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फ्रांस में बने राफेल-मरीन (Rafale-M) लड़ाकू विमान ने स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत के डेक पर पहली बार सफल लैंडिंग की। 29 अक्टूबर को हुए इस परीक्षण में विमान ने पहली ही कोशिश में सफलतापूर्वक लैंडिंग की। इसके बाद इसने स्की-जंप तकनीक से उड़ान भी भरी। भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर को इसकी जानकारी साझा की। यह परीक्षण भारत के विमानवाहक पोतों पर राफेल-M को ऑपरेशनल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस उपलब्धि से भारतीय नौसेना की समुद्र में हवाई हमले, दुश्मन के विमानों को रोकने और समुद्री सीमाओं की निगरानी करने की क्षमता मजबूत होगी। खासतौर पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की बढ़ती गतिविधियों के बीच इसे भारत की सामरिक ताकत बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।
26 राफेल-M विमानों के लिए हुआ है समझौता
भारत और फ्रांस ने अप्रैल 2025 में करीब 63,000 करोड़ रुपये का रक्षा समझौता किया था। इसके तहत भारतीय नौसेना को 26 राफेल-M लड़ाकू विमान मिलने हैं। इनमें 22 सिंगल सीटर लड़ाकू विमान और चार डबल सीटर प्रशिक्षण विमान शामिल हैं।
इन विमानों की डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है। पूरी आपूर्ति 2030 तक होने का लक्ष्य है। ये विमान INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य दोनों विमानवाहक पोतों से संचालित किए जा सकेंगे।
नौसेना की हमला करने की क्षमता कैसे बढ़ेगी?
राफेल-M की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउद्देशीय युद्ध क्षमता है। यह केवल दुश्मन के विमानों को मार गिराने तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री और जमीन पर मौजूद ठिकानों को भी निशाना बना सकता है।
इसकी प्रमुख क्षमताएं हैं:
- 1,000 किलोमीटर का कॉम्बैट रेडियस: विमानवाहक पोत से उड़ान भरकर दूर समुद्री इलाकों में ऑपरेशन करने की क्षमता।
- मेटियोर मिसाइल: लंबी दूरी पर दुश्मन के लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने में सक्षम।
- MICA मिसाइल: हवा में दुश्मन के विमानों को रोकने के लिए इस्तेमाल।
- SCALP मिसाइल: दूर स्थित जमीन के रणनीतिक ठिकानों पर हमला करने की क्षमता।
- HAMMER हथियार: सटीक निशाना लगाने वाले हमलों के लिए उपयोगी।
- आधुनिक रडार: AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने और खतरों से बचने में मदद मिलेगी।
चीन के मुकाबले भारत को क्या फायदा?
हिंद महासागर में चीन अपनी नौसैनिक मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। उसके पास विमानवाहक पोतों का बेड़ा और आधुनिक युद्धपोत हैं। ऐसे में भारत के लिए समुद्र में अपनी हवाई ताकत मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
राफेल-M की तैनाती से भारतीय नौसेना अपने विमानवाहक पोत से ही लड़ाकू विमानों को दूर तक भेज सकेगी। इससे समुद्री निगरानी, हवाई सुरक्षा और दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ेगी। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव विमान की संख्या, हथियारों, समुद्री परिस्थितियों और अन्य सैन्य संसाधनों के समन्वय पर निर्भर करेगा।
मिग-29K की जगह लेगा राफेल-M
फिलहाल भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोतों पर रूसी मूल के मिग-29K लड़ाकू विमान तैनात हैं। राफेल-M इनके मुकाबले आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और हथियार प्रणालियों से लैस होगा। इससे नौसेना की हवाई युद्ध क्षमता में तकनीकी उन्नति होगी।
क्या दोगुनी हो जाएगी नौसेना की ताकत?
राफेल-M की आमद से नौसेना की हमला करने की क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि, क्षमता दोगुनी होने का दावा अभी एक अनुमानित आकलन है, कोई आधिकारिक सैन्य आंकड़ा नहीं। INS विक्रांत पर सफल परीक्षण ने यह जरूर साबित किया है कि भारत अपने विमानवाहक पोतों से आधुनिक फ्रांसीसी लड़ाकू विमान संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 26 विमानों की तैनाती के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक पहुंच और समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।


