मिडिल-ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान को लेकर सख्त रुख के बीच क्षेत्र में सैन्य तैयारियां तेज होने लगी हैं। ताजा घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में ईरान के खिलाफ फिर से बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, फिलहाल इजरायल या अमेरिका ने किसी नए हमले की अंतिम घोषणा नहीं की है। तनाव की नई वजह बनी है फ्लाईदुबई की वह घटना, जिसमें दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान के दौरान सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया था। विमान करीब 14 हजार फीट नीचे गिरा, लेकिन घायल कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों ने हमलावर को काबू किया और विमान की सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घटना को गंभीर सुरक्षा मामला बताते हुए कहा है कि सह-पायलट कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था। नेतन्याहू ने को-पायलट भेजने वाले देश को सजा देने का ऐलान कर दिया है। इजरायल समेत कई एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। हालांकि, अब तक ईरान से इस घटना के सीधे संबंध का कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अगर जांच में ईरान की भूमिका साबित होती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इसी बीच अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 9,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिक और तीसरा विमानवाहक पोत क्षेत्र में भेजा जा रहा है। इससे क्षेत्र में संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाएं और बढ़ गई हैं।
खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर भी अमेरिका सतर्क है। सऊदी अरब और कतर में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। वहीं, अमेरिकी युद्धपोत पहले से अरब सागर में मौजूद हैं और ईरान के खिलाफ चल रहे अभियानों के समर्थन में तैनात किए गए हैं।
इन घटनाक्रमों के बीच ईरान भी संभावित हमले की स्थिति में जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर है। फिलहाल सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं, लेकिन इसे निश्चित तौर पर नए इजरायली-अमेरिकी हमले की शुरुआत कहना जल्दबाजी होगी।


