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RSS की तारीफ पर दी सफाई, अब यह बोले दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ‘संगठनात्मक शक्ति’ की प्रशंसा किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विवाद बढ़ता देख दिग्विजय सिंह ने रविवार, 28 दिसंबर 2025 को अपने बयान पर सफाई पेश की।

​विवाद की मुख्य वजह

​यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर 1990 के दशक की एक पुरानी ब्लैक-एंड-व्हाइट तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में नरेंद्र मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पास जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं। सिंह ने इस पोस्ट में लिखा कि कैसे आरएसएस का एक जमीनी कार्यकर्ता फर्श पर बैठकर देश का प्रधानमंत्री बन गया, जिसे उन्होंने ‘संगठन की शक्ति’ बताया।

​दिग्विजय सिंह का स्पष्टीकरण

​अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संगठन की कार्यप्रणाली की तारीफ की है, न कि आरएसएस की विचारधारा की। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • ​विचारधारा का विरोध: सिंह ने कहा, “मैं शुरुआत से ही संघ की विचारधारा का विरोधी रहा हूं और रहूंगा। वे न तो संविधान का पूरी तरह सम्मान करते हैं और न ही देश के कानून का।”
  • ​संगठन बनाम विचारधारा: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल उस अनुशासन और ढांचे के प्रशंसक हैं जो एक कार्यकर्ता को शीर्ष तक पहुंचाता है।
  • ​कांग्रेस को नसीहत: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रशंसा के जरिए सिंह अपनी ही पार्टी (कांग्रेस) के नेतृत्व को संगठन को मजबूत करने और सत्ता के विकेंद्रीकरण का संदेश देना चाह रहे थे।

​भाजपा और अन्य दलों की प्रतिक्रिया

​भाजपा ने इस बयान को कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह और राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल के रूप में पेश किया है। झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह जैसे कट्टर आलोचक का यह स्वीकार करना संघ की राष्ट्रव्यापी स्वीकार्यता को दर्शाता है। वहीं, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने इस पर हैरानी जताई।

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