More
    HomeHindi NewsDelhi Newsसीजेपी नेताओं को भेजा जेल, विपक्ष ने पूछा-तिरंगा लहराना जुर्म है क्या,...

    सीजेपी नेताओं को भेजा जेल, विपक्ष ने पूछा-तिरंगा लहराना जुर्म है क्या, राहुल से लेकर केजरीवाल तक यह बोले?

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार को घेरा है। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई केवल तिरंगा लहराने के कारण नहीं, बल्कि कथित तौर पर कानून का उल्लंघन करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोपों के चलते की गई है।

    पांच दिन की न्यायिक हिरासत में क्यों भेजे गए नेता?

    दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और सीजेपी के अन्य सदस्य जंतर-मंतर पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर जाने की अनुमति नहीं होने के बावजूद बैरिकेड पार किए और निजी परिसर के रास्ते वहां प्रवेश किया। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए गए और तिरंगा लहराया गया।

    पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को अपना काम करने से रोका। पुलिस के मुताबिक, नेताओं ने पहले शांति बनाए रखने के लिए बांड भरा था, लेकिन उन्होंने उसकी शर्तों का कथित उल्लंघन किया। सोशल मीडिया के जरिए दूसरे लोगों को भी ऐसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करने की आशंका को कार्रवाई का आधार बताया गया।

    बुधवार को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है। वहीं, अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति और सद्व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर निजी मुचलके और पांच हजार रुपये की जमानत राशि के साथ रिहा किया गया। पुलिस ने मामले में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं।

    राहुल गांधी बोले- शांतिपूर्ण प्रदर्शन अपराध नहीं

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दोनों नेताओं की हिरासत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है और युवाओं को जेल भेजना कायरता है। राहुल ने छात्रों, युवाओं, पत्रकारों और विपक्षी दलों के आंदोलनों को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की मांग से जोड़ते हुए कहा कि जंतर-मंतर जनता का है और उसे वापस हासिल किया जाएगा।

    केजरीवाल ने पूछा- क्या तिरंगा लहराना जुर्म है?

    आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या अपने ही देश में तिरंगा लहराना अपराध है? केजरीवाल ने नेताओं की हिरासत को अनुचित बताते हुए सरकार और प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना की।

    अभिजीत दीपके ने सरकार पर साधा निशाना

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बनाई जा रही है। दीपके ने सवाल किया कि जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज लहराने के लिए नेताओं को पांच दिन हिरासत में रखना क्यों जरूरी था।

    विवाद की जड़ में जंतर-मंतर और चुनाव आयोग

    यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है, जब सीजेपी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है। जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रवेश और प्रदर्शन की अनुमति को लेकर टकराव हुआ। पुलिस का पक्ष है कि कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी, जबकि विपक्षी नेताओं ने इसे विरोध की आवाज दबाने का मामला बताया है।

    अब इस मामले में पुलिस के आरोपों और विपक्ष के विरोध के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। मुख्य सवाल यह है कि प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के नियमों के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments