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    इंडिया ब्लॉक के नेताओं से मिलने से CJI का इनकार? हरीश साल्वे बोले-ये विपक्ष की सरासर मूर्खता

    इंडिया ब्लॉक के नेताओं और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के बीच मुलाकात का विवाद सोमवार को चर्चा में है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगें रखने के लिए सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। हालांकि, सीजेआई ने मुलाकात से इनकार कर दिया। इसके बाद पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने विपक्ष के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘सरासर मूर्खता’ बताया।

    सीजेआई ने मुलाकात से क्यों किया इनकार?

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायिक मर्यादा और लंबित मामलों का हवाला देते हुए विपक्षी नेताओं से मुलाकात करना उचित नहीं माना। जिन मुद्दों पर विपक्ष चर्चा करना चाहता था, उनसे संबंधित मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सीजेआई की भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि न्यायिक भी है।

    सूत्रों के अनुसार, सीजेआई का मानना था कि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से इस तरह मुलाकात करने के बजाय संबंधित पक्षों को न्याय पाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए। अदालत याचिकाओं पर सुनवाई करके और दलीलों पर विचार करने के बाद आदेश देती है।

    विपक्ष की क्या थीं मांगें?

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे सहित इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 12 अक्टूबर को सीजेआई से मिलने का समय मांगा था। विपक्ष की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

    • चुनाव प्रक्रिया में कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कार्रवाई।
    • मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
    • मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक।
    • मतदान के लिए बैलेट पेपर व्यवस्था बहाल करने की मांग।

    विपक्षी नेताओं ने इन मुद्दों पर ज्ञापन सौंपने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर न्यायपालिका का ध्यान आकर्षित करने की योजना बनाई थी।

    हरीश साल्वे क्यों भड़के? अदालत को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप

    पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इंडिया ब्लॉक के नेताओं के सीजेआई से मिलने के प्रयास पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों में कई वरिष्ठ वकील हैं, फिर भी नेताओं ने इस प्रक्रिया को अपनाया। उनके मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश व्यक्तिगत रूप से हर मामले की सुनवाई नहीं करते। संबंधित याचिकाओं पर अदालत की निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होती है।

    साल्वे ने विपक्ष के कदम को ‘शीयर स्टुपिडिटी’ यानी ‘सरासर मूर्खता’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है। साल्वे का कहना है कि यदि किसी पक्ष को अदालत के फैसले से असहमति है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी दलील रखनी चाहिए, न कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने चाहिए।

    क्या है इस विवाद का संवैधानिक पहलू?

    इस पूरे मामले में दो सवाल अहम हैं। पहला, चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष की मांगों पर कानूनी सुनवाई किस तरह हो सकती है। दूसरा, राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल द्वारा सीधे सीजेआई से मुलाकात की मांग करना न्यायिक मर्यादा के अनुरूप है या नहीं।

    सीजेआई की ओर से मुलाकात से इनकार को न्यायिक प्रक्रिया और लंबित मामलों से जुड़ी सावधानी के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, साल्वे ने विपक्ष के तरीके की आलोचना की है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और मांगों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

    इस घटनाक्रम ने न्यायपालिका, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों के बीच संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर है कि इंडिया ब्लॉक अपने मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाता है।

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