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BMC चुनाव परिणाम 2026: ठाकरे बंधुओं का साथ भी नहीं आया काम, महायुति की बड़ी जीत

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव 2026 के ऐतिहासिक परिणामों ने मुंबई की राजनीति की दिशा बदल दी है। वर्षों बाद एक साथ आए ‘ठाकरे बंधुओं’—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—का गठबंधन जादुई आंकड़ा छूने में विफल रहा। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बीजेपी और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली ‘महायुति’ ने बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि ठाकरे गठबंधन को विपक्ष में बैठने पर मजबूर होना पड़ा है।

चुनावी आंकड़ों का गणित

मुंबई की 227 सीटों पर हुए इस कड़े मुकाबले में सत्ता का समीकरण कुछ इस प्रकार रहा:

  • महायुति (BJP + शिंदे सेना): कुल 121 सीटें (बीजेपी: 89, शिंदे सेना: 29, एनसीपी अजित: 3)।
  • ठाकरे गठबंधन (UBT + MNS + NCP-SP): कुल 71 सीटें (शिवसेना UBT: 65, मनसे: 6)।
  • अन्य: कांग्रेस को 24 और AIMIM को 8 सीटें मिलीं।

ठाकरे बंधुओं की हार के मुख्य कारण

  1. वोटों का बिखराव: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि उद्धव और राज ठाकरे साथ आए, लेकिन कैडर स्तर पर जमीनी समन्वय की कमी रही। कई वार्डों में कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) ने उनके पारंपरिक मराठी वोटों में सेंध लगाई।
  2. संसाधनों की ताकत: बीजेपी ने इस चुनाव को अपनी पूरी ताकत और संसाधनों के साथ लड़ा। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की रैलियों के साथ-साथ देवेंद्र फडणवीस की रणनीतियों ने महायुति को बढ़त दिलाई।
  3. विकासात्मक एजेंडा बनाम अस्मिता: ठाकरे बंधुओं ने ‘मराठी अस्मिता’ को मुख्य मुद्दा बनाया, जबकि महायुति ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों को आगे रखा, जिसे मुंबई के मध्यम वर्ग और गैर-मराठी मतदाताओं ने सराहा।

पारंपरिक गढ़ों में बढ़त, पर सत्ता से दूर

निराशाजनक प्रदर्शन के बावजूद, शिवसेना (UBT) और मनसे गठबंधन ने मध्य मुंबई, दादर, और परेल जैसे अपने पारंपरिक गढ़ों में मजबूती दिखाई है। मातोश्री के प्रभाव वाले क्षेत्रों में ठाकरे गुट ने बढ़त बनाई, लेकिन उपनगरों (Suburbs) में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन कर उन्हें सत्ता की दौड़ से बाहर कर दिया।

25 साल से अधिक समय तक बीएमसी पर राज करने के बाद, पहली बार ठाकरे परिवार के हाथ से एशिया की सबसे अमीर नगर निकाय की सत्ता फिसल गई है। यह परिणाम न केवल मुंबई के लिए, बल्कि आगामी राज्य विधानसभा की राजनीति के लिए भी बड़े संकेत हैं।

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