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पाकिस्तान के खिलाफ एक और ‘वॉटर स्ट्राइक’, अब रावी नदी के पानी को भी रोकने की तैयारी

भारत और पाकिस्तान के बीच जल कूटनीति अब एक नए और कड़े मोड़ पर पहुँच गई है। भारत सरकार ने सिंधु जल संधि (IWT) को पहले ही ‘निलंबित’ (Abeyance) कर दिया है, और अब रावी नदी के अतिरिक्त पानी को भी पाकिस्तान जाने से पूरी तरह रोकने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

शाहपुर कंडी बांध: पाकिस्तान के लिए ‘वॉटर स्ट्राइक’

इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र शाहपुर कंडी बांध (Shahpur Kandi Dam) परियोजना है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित यह बांध अब अपने अंतिम चरण में है।

  • डेडलाइन: जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री जावेद अहमद राणा के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 31 मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा।
  • अतिरिक्त पानी पर रोक: अब तक भारत की ओर से रावी नदी का जो ‘सरप्लस’ या अतिरिक्त पानी स्टोरेज की कमी के कारण बहकर पाकिस्तान चला जाता था, उसे 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
  • भारत को लाभ: इस पानी का उपयोग जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों की करीब 32,173 हेक्टेयर भूमि और पंजाब की 5,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए किया जाएगा।

सिंधु जल संधि के बाद दूसरा बड़ा झटका

पहलगाम में हुए आतंकी हमले (अप्रैल 2025) के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रसिद्ध बयान “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते” को अब धरातल पर उतारा जा रहा है।

  1. संधि का निलंबन: भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है, जिसके तहत वह अब अपनी नदियों के पानी के अधिकतम उपयोग के लिए स्वतंत्र है।
  2. पश्चिमी नदियों पर नियंत्रण: भारत चिनाब और झेलम नदियों पर भी कई जलविद्युत परियोजनाओं (जैसे रैटल और पाकल दुल) के काम में तेजी ला रहा है।
  3. तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: दशकों से रुके हुए इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की योजना है, जिससे वुलर झील में पानी के स्तर को नियंत्रित किया जा सके।

पाकिस्तान पर प्रभाव

पाकिस्तान के लिए यह स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है क्योंकि उसकी 80% खेती सिंधु नदी तंत्र पर निर्भर है। गर्मियों की शुरुआत से ठीक पहले पानी रुकने से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सूखे का संकट गहरा सकता है। पाकिस्तान ने इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ‘पानी का हथियार’ (Weaponization of water) बताया है, लेकिन भारत का रुख स्पष्ट है कि वह अपने हिस्से के पानी की एक बूंद भी बर्बाद नहीं होने देगा।

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