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अमेरिका और ईरान शांति वार्ता के लिए तैयार, पाक पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने रखीं ये शर्तें

अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए अमेरिका और ईरान शांति वार्ता के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।

शहबाज शरीफ और ईरानी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात

इस कूटनीतिक हलचल के बीच पाकिस्तान की भूमिका भी अहम होती दिख रही है। ईरान के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की है। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, विशेष रूप से इजरायल-ईरान तनाव और लाल सागर (Red Sea) के हालातों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस विवाद में एक मध्यस्थ के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

ईरान की अहम शर्त: ‘सम्मान और संप्रभुता’

तेहरान ने शांति वार्ता या किसी भी प्रकार के समझौते के लिए अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, ईरान ने बातचीत की मेज पर आने के लिए प्रमुख शर्त रखी है:

  • प्रतिबंधों में ढील: ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्यात और बैंकिंग सेक्टर पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए।
  • संप्रभुता का सम्मान: ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी सैन्य क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रभाव पर किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
  • इजरायल का रुख: तेहरान की ओर से यह भी संकेत मिले हैं कि शांति तभी संभव है जब अमेरिका इजरायल की आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों पर लगाम लगाए।

अमेरिका का रुख: ‘सतर्क कदम’

अमेरिका प्रशासन इस समय सावधानी बरत रहा है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध को रोकना है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने और प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करने पर गंभीरता दिखाता है, तो कूटनीतिक रास्ते खुले हैं।

क्या युद्ध टलेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष शांति वार्ता अभी दूर की कौड़ी है, लेकिन दोनों पक्षों का बातचीत के प्रति लचीला रुख दिखाना एक सकारात्मक संकेत है। वर्तमान में पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है, ऐसे में इन कूटनीतिक कोशिशों का सफल होना वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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