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अजित पवार के निधन से बिगड़े समीकरण, महायुति और NCP का क्या होगा भविष्य?

उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन ने न केवल महाराष्ट्र की सरकार (महायुति) बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भविष्य पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। “दादा” के नाम से मशहूर अजित पवार पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और विधायकों के बीच सबसे लोकप्रिय चेहरा थे।

​उनके बाद पार्टी के सामने तीन मुख्य रास्ते और नेतृत्व के कुछ संभावित चेहरे नजर आ रहे हैं:

​1. शरद पवार गुट के साथ सुलह या विलय?

​अजित पवार के निधन से पहले ही राजनीति के गलियारों में “चाचा-भतीजा” के बीच सुलह की सुगबुगाहट तेज थी। हाल ही में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निकाय चुनावों में दोनों गुटों ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया था।

  • ​दबाव: अब कार्यकर्ताओं और विधायकों के बीच अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए शरद पवार के नेतृत्व में वापस लौटने का भारी दबाव हो सकता है।
  • ​विलय की संभावना: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार के बिना इस गुट को एकजुट रखना मुश्किल होगा, जिससे पार्टी के शरद पवार के साथ फिर से विलय की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

​2. कौन होगा नया नेतृत्व?

​पार्टी में फिलहाल नेतृत्व के लिए इन नामों पर चर्चा गर्म है:

  • ​सुनेत्रा पवार: अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद। उन्हें परिवार की विरासत संभालने के लिए एक “सर्वमान्य चेहरे” के रूप में देखा जा रहा है।
  • ​प्रफुल्ल पटेल: वर्तमान में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और दिल्ली की राजनीति का बड़ा चेहरा। वे संगठन को संभालने का अनुभव रखते हैं।
  • ​सुप्रिया सुले और रोहित पवार: यदि विलय की बात आगे बढ़ती है, तो सुप्रिया सुले (केंद्र) और रोहित पवार (राज्य) के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी आ सकती है।

​3. नया रास्ता और महायुति का भविष्य

​एक धड़ा ऐसा भी हो सकता है जो बीजेपी के साथ बने रहना चाहे।

  • ​विखंडन का डर: अजित पवार के निधन के बाद 41 विधायकों वाले इस गुट में बिखराव का खतरा है। कुछ विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं, जबकि कुछ शरद पवार के पास वापस जा सकते हैं।
  • ​सत्ता का समीकरण: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती होगी कि वे इस गुट को कैसे साथ रखते हैं, क्योंकि अजित पवार ही महायुति में एनसीपी के सबसे बड़े स्तंभ थे।

​निष्कर्ष: महाराष्ट्र की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है। क्या ‘पवार परिवार’ इस दुख की घड़ी में फिर से एक होगा, या पार्टी पूरी तरह बिखर जाएगी? यह आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर साफ हो जाएगा।

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